ठेंगे पर आदेश, राजधानी की हवा में प्रदूषण का जहर घोल रही सडक़ों पर डंप निर्माण सामग्री

ठेंगे पर आदेश, राजधानी की हवा में प्रदूषण का जहर घोल रही सडक़ों पर डंप निर्माण सामग्री

हाईकोर्ट और यूपीपीसीबी के आदेशों की खुलेआम उड़ाई जा रहीं धज्जियां
विक्रेता और भवन निर्माणकर्ता खुले में छोड़ देते हैं निर्माण सामग्री

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सडक़ पर बिखरी भवन निर्माण सामग्री राजधानी की हवा को लगातार प्रदूषित कर रही है। हाईकोर्ट और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों के बावजूद विक्रेता और भवन बनवाने वाले निर्माण सामग्री को सडक़ों पर रख रहे हैं। इसके कारण धूल कण हवा में घुल रहे हंै और हवा के जरिए लोगों के फेफड़ों को संक्रमित कर रहे हैं। इसके कारण लोगों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है।
राजधानी ही नही पूरे प्रदेश में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण बढ़ाने के कारकों में धूल और रेत के कण अहम हंै। ये हवा में घुलकर पहले से प्रदूषित हवा को और भी प्रदूषित कर देते हैं। इसको रोकने के लिए हाईकोर्ट और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्देश जारी कर रखा है लेकिन इसका असर निर्माण सामग्री बेचने वालों और भवनों का निर्माण कराने वालों पर नहीं दिख रहा है। वे सडक़ों पर निर्माण सामग्री को डंप कर रहे हैं। इससे राजधानी में प्रदूषण का खतरा और बढ़ गया है। 18 अक्टूबर 2019 को यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने वायु प्रदूषण फैलाने पर सरकारी व निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 25 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए एक्शन प्लान शहर में लागू किया गया था। इसमें प्रमुख रूप से बड़े निर्माणों को प्राथमिकता में रखा गया था। ऐसे निर्माण की जांच कराई गई थी जो वायु प्रदूषण फैला रहे थे। इसके बाद 25 संस्थानों को नोटिस जारी किया गया था। इसमें सरकारी और निजी क्षेत्र के निर्माण शामिल थे। यूपीपीसीबी के मुताबिक सभी निर्माण कराने वालों को अपने यहां धूल उडऩे से रोकनी है। इसके लिए बिल्डिंग मैटेरियल को जहां ढंककर रखना है, वहीं बालू-मौरंग पर पानी का लगातार छिडक़ाव सुनिश्चित करना है। बावजूद इसके स्थितियों में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है।

क्या हैं निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्माण सामग्री को ढक कर रखने और बालू और मौरंग पर पानी का लगातार छिडक़ाव करने निर्देश दिए थे। ऐसा ही निर्देश यूपीपीसीबी ने जारी किया था लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

कोरोना और अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक

कोरोना और अस्थमा रोगियों के लिए बढ़ता प्रदूषण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसका कारण यह है कि दोनों ही रोगों में फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। श्वास नली में सूजन आ जाती है, जिससे मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। यदि राजधानी में प्रदूषण के स्तर पर लगाम नहीं लगाया गया तो कोरोना संक्रमण के दौर में यह संक्रमित रोगियों के लिए भयानक साबित हो सकता है।

पराली जलाने वालों पर भी नजर
खेतों में पराली जलाने से फैलने वाले प्रदूषण को लेकर उच्चाधिकारियों ने सख्त निर्देश दिए हैं। इसको रोकने के लिए थानेदारों को जवाबदेह बनाया गया है। हालांकि निर्माण सामग्री को लेकर अभी तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

निर्माण सामग्री ठीक तरीके से रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों का पालन सख्ती से करवाया जाएगा। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जेपीएस राठौर, चेयरमैन यूपीपीसीबी

https://www.youtube.com/watch?v=VkBMPZ499lA

Next Story
Share it