जोखिम में जर्जर बैरकों और घरों में रह रहे पुलिसकर्मियों की जान

जोखिम में जर्जर बैरकों और घरों में रह रहे पुलिसकर्मियों की जान

वर्षों से नहीं हुई मरम्मत, बारिश में टपकती हैं छतें, जिम्मेदार लापरवाह
बिल्डिंगों को अंदर से रंग-रोगन कर चलाया जा रहा काम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर बैरक और आवासीय कॉलोनियों में रह रहे हैं। ये पूरी तरह खस्ताहाल हो चुकी हंै। बारिश के दौरान कॉलोनी के तमाम घरों की छतें टपकने लगती हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्षों से इन बैरकों और घरों में मरम्मत का काम तक नहीं कराया गया है। बिल्डिंगों को रंग-रोगन कर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां कभी भी कानपुर जैसा बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता ही नहीं है।
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के यातायात विभाग का मुख्यालय बंदरियाबाग में है। यह कार्यालय अंग्रेजों के समय का बना है। पूरा क्षेत्र लखनऊ छावनी में आता है। पहले इस बिल्डिंग में सैन्य बल का कार्यालय हुआ करता था जिसे बाद में लखनऊ यातयात पुलिस का कार्यालय बनाने के लिए सौंप दिया गया। यह बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है लेकिन इसे रंग-रोगन कर काम चलाया जा रहा है। यहां पुलिसकर्मियों के लिए दो बैरक और 51 आवासीय कॉलोनियां हैं। इनमें एक बैरक पूरी तरह खस्ताहाल है। चार कॉलोनियों को पूरी तरह कंडम घोषित कर दिया गया है जबकि एक दर्जन से अधिक आवासीय कॉलोनियां जर्जर हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि कंडम घोषित हो चुकी बिल्ंिडगों को अभी तक ध्वस्त नहीं किया गया है। ऐसे में ये बिल्डिंगें दूसरे घरों के लिए खतरा बन चुकी हैं। इन आवासीय कॉलोनियों में सैकड़ों पुलिसकर्मियों के परिवार रहते हैं। इन बिल्डिंगों के कई घरों की छतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बारिश में छतों से पानी टपकता है। सीढिय़ों की रेलिंग तक उखड़ चुकी है। दअरसल, बाहर से अपने परिवार के साथ आये पुलिसकर्मियों को ट्रैफिक पुलिस लाइन के पीछे बनी आवासीय कॉलोनियों में फ्लैट अलॉट कर दिए जाते हैं जबकि अन्य को पुलिस बैरकों में कमरा दिया जाता है। गौरतलब है कि हाल ही में कानपुर में जर्जर बैरक गिरने से एक पुलिस कर्मी की मौत हो गई थी जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

उखडऩे लगे हैं प्लास्टर, रंग-रोगन तक नहीं

ट्रैफिक पुलिस लाइन में बनी आवासीय कॉलोनियां बेहद खस्ता हाल हो चुकी हैं। यहां बने आवासों के प्लास्टर तक उखडऩे लगे हैं। छतें जर्जर हो चुकी हैं। इनकी आज तक मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। कई इमारतों में तो वर्षों से रंग-रोगन तक नहीं कराया गया है। ऐसी स्थिति में यहां रहने वाली सैकड़ों जिंदगियों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।

जर्जर भवनों को जल्द खाली कराया जायेगा। ऐसे भवनों को चिन्हित करने के आदेश दिए गए हैं। खराब बैरक को ध्वस्त कर नए बैरक बनाये जाएंगे।

  • पुर्णेन्दु, अपर पुलिस उपायुक्त यातायात

https://www.youtube.com/watch?v=Qkp2ZV8gU7s

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