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चाइनीज मांझा, मेट्रो और लापरवाह तंत्र

चाइनीज मांझा, मेट्रो और लापरवाह तंत्र

sanjay sharma

सवाल यह है कि प्रतिबंध के बाद भी चाइनीज मांझा बाजार में धड़ल्ले से कैसे बिक रहा है? क्या सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण स्थितियों में सुधार नहीं हो रहा है? मांझे की बिक्री और उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों है? मेट्रो को हो रही क्षति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

चाइनीज मांझा न केवल लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है बल्कि यह लखनऊ मेट्रो के परिचालन को भी लगातार बाधित कर रहा है। तीन साल के भीतर ट्रिपिंग के 508 मामले लखनऊ मेट्रो ने दर्ज कराए हैं। कई बार प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। चाइनीज मांझे के कारण कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं और कुछ की मौत हो चुकी है। सवाल यह है कि प्रतिबंध के बाद भी चाइनीज मांझा बाजार में धड़ल्ले से कैसे बिक रहा है? क्या सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण स्थितियों में सुधार नहीं हो रहा है? मांझे की बिक्री और उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों है? मेट्रो को हो रही क्षति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? क्या लोगों की जान को जोखिम में डालने की छूट किसी को दी सकती है?
लखनऊ में अधिकांश पतंगबाज चाइनीज मांझे का प्रयोग करते हैं। यह मांझा प्लास्टिक से निर्मित होता है और इस पर लोहे का प्रयोग किया जाता है। मांझा यदि किसी बिजली के तार से छू जाए तो पतंगबाज को करंट लग सकता है। इसके अलावा किसी के गले में फंस जाने पर यह उस व्यक्ति को बुरी तरह जख्मी कर देता है। इस मांझे की चपेट में आकर राजधानी में कई लोगों की मौत हो चुकी है। नवंबर 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगा दी थी। प्रतिबंध के बावजूद यह मांझा बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है। सामान्य मांझे से सस्ता होने के कारण पतंगबाजों में इसकी जबरदस्त मांग है। वहीं मांझे से हो चुकी तमाम दुर्घटनाओं के बावजूद पुलिस-प्रशासन इस पर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि आज तक चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ कोई सघन अभियान नहीं चलाया गया न ही ऐसे पतंगबाजों की धर-पकड़ की गई। हालत यह है कि इस मांझे के चलते मेट्रो को क्षति पहुंच रही है। मांझा फंसने से मेट्रो की ओएचई लाइन ट्रिप कर जाती है। ऐसा पांच सौ से अधिक बार हो चुका है। यह स्थिति तब है जब मेट्रो रेलवे अधिनियम 2002 के तहत मेट्रो की संपत्ति को क्षति पहुंचाने पर दस साल की सजा तथा बिना वारंट गिरफ्तारी का प्रावधान है। मेट्रो की ओएचई लाइन से 25 हजार वोल्ट की बिजली आपूर्ति होती है। इससे पतंग उड़ाने वाले की करंट से जान जा सकती है। यदि सरकार मेट्रो को बाधित होने और मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना चाहती है तो वह इसकी बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही ऐसे पतंगबाजों की धर-पकड़ भी कराना सुनिश्चित करे जो अपने साथ दूसरों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=OuMFhQQt3Us

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