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गूगल की मोनोपोली से पार पाना बड़ी चुनौती

गूगल की मोनोपोली से पार पाना बड़ी चुनौती

sanjay sharma

गूगल ने 22 साल पहले एक मामूली सी सर्च वेबसाइट के साथ इंटरनेट की दुनिया में कदम बढ़ाया था और इन 22 सालों में बड़े से बड़े खिलाडि़य़ों के विकेट उखाड़ दिए। आज इंटरनेट, और खासकर सर्च के 90 फीसदी से ज्यादा कारोबार पर इसका कब्जा है। और अब जब गूगल ने मोटी रकम के बदले एप्पल को भी राजी कर लिया है तो कई स्तरों पर उसका विरोध शुरू हो गया है। विरोध ही नहीं, यह मामला अब अमेरिका के न्याय विभाग में पहुंच गया है, जहां उसके खिलाफ एंटी ट्रस्ट कानूनों के अनुसार मामला चलेगा।

मोनोपोली यानी एकाधिकार। देश व दुनिया का हर कारोबारी यही चाहता है कि सारी दुनिया उसकी मुी में आ जाए। यहां तक कि हर कारोबारी नया करने व सोचने के लिए बाध्य रहता है लेकिन हकीकत में वो स्पद्र्धा को खत्म करके बाजार को अपने कब्जे में ले नहीं पाता। बल्कि फाइट करता रहता है अपने कारोबार को सफल बनाने के लिए। हालांकि कुछ इसमें कामयाब भी हो जाते हैं। लेकिन मोनोपोली की दिक्कत यह है कि यह कुछ लंबी भले खिंच जाए, पर स्थाई कभी नहीं होती। इस समय गूगल के खिलाफ अमेरिका में मोनोपोली का जो मामला चल रहा है, उसमें इस तरह की कंपनियों की चर्चा करने का बहुत अर्थ भी नहीं है। अगर हम गूगल पर चर्चा करें तो हमारी दुनिया में एक ऐसी पीढ़ी पैदा होकर जवान भी हो चुकी है, जो गूगल की उंगली पकडक़र इंटरनेट की दुनिया में पहुंची है। बहुत से लोगों के लिए इंटरनेट गूगल से ही शुरू होता है, चाहे वह उनके पास मोबाइल फोन से पहुंचे या फिर लैपटॉप से। वैसे गूगल कंपनी अब सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं है, वह कार में भी पहुंच चुकी है और टेलीविजन में भी। कंपनी ने 22 साल पहले एक मामूली सी सर्च वेबसाइट के साथ इंटरनेट की दुनिया में कदम बढ़ाया था और इन 22 सालों में बड़े से बड़े खिलाडि़य़ों के विकेट उखाड़ दिए। आज इंटरनेट, और खासकर सर्च के 90 फीसदी से ज्यादा कारोबार पर इसका कब्जा है। और अब जब गूगल ने मोटी रकम के बदले एप्पल को भी इसके लिए राजी कर लिया है तो कई स्तरों पर उसका विरोध शुरू हो गया है। विरोध ही नहीं, यह मामला अब अमेरिका के न्याय विभाग में पहुंच गया है, जहां उसके खिलाफ एंटी ट्रस्ट कानूनों के अनुसार मामला चलेगा। मगर सच में देखा जाए तो गूगल की मोनोपोली से पार पाना बड़ी अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है। मगर चुनावी लड़ाई में बुरी तरह घिरे अमेरिकी राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रंप टेक कंपनियों के पीछे ल लेकर पड़ गए हैं। यह बात तो वह कई बार कह चुके हैं कि टेक कंपनियां उनके खिलाफ हैं। दूसरी तरफ यह मान लेना भी उचित नहीं है कि गूगल कंपनी पूरी तरह से घिर चुकी है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और फिर इंटरनेट बाजार में स्पद्र्धा के एक नए युग की शुरुआत होगी। ऐसा ही एक मामला दो दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ तब शुरू हुआ था, जब उसने ब्राउजर के बाजार में नेटस्केप नेविगेटर को मात देने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम के अपने एकाधिकार का बेजा फायदा उठाने की कोशिश की थी। लेकिन यह मामला ज्यादा चला नहीं। अमेरिका के लिए माइक्रोसॉफ्ट और गूगल सिर्फ कारोबार नहीं हैं, वे तकनीक की दुनिया में अमेरिकी दबदबे का बहुत बड़ा प्रतीक भी हैं। इसलिए गूगल के खिलाफ चलने वाला मामला भी देर-सवेर वहीं पहुंचेगा, या शायद वहीं पहुंचा दिया जाएगा, जहां कभी माइक्रोसॉफ्ट का मामला पहुंचा था।

https://www.youtube.com/watch?v=r1oJbXq2ihc

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