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गंदगी भारत छोड़ो नारे के मायने और हकीकत

गंदगी भारत छोड़ो नारे के मायने और हकीकत

sanjay sharma

सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री का यह नारा लोगों और राज्य सरकारों के लिए प्रेरणा बन सकेगा? क्या स्वच्छता अभियान का असर देश पर पड़ा है? क्या नगर निगम और नगर पालिकाएं शहरों को साफ-सुथरा रख पाने में सफल हो सकी हैं? स्वच्छता के मानकों में उत्तर प्रदेश के शहर किस पायदान पर खड़े हैं? देश के तमाम शहरों में गंदगी का साम्राज्य क्यों फैला है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्टï्रीय स्वच्छता केंद्र का लोकार्पण करते हुए गंदगी भारत छोड़ो का नया नारा दिया। पीएम ने काफी पहले देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। यही नहीं स्मार्ट सिटी के मानकों में इसको प्रमुख स्थान दिया गया है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री का यह नारा लोगों और राज्य सरकारों के लिए प्रेरणा बन सकेगा? क्या स्वच्छता अभियान का असर देश पर पड़ा है? क्या नगर निगम और नगर पालिकाएं शहरों को साफ-सुथरा रख पाने में सफल हो सकी हैं? स्वच्छता के मानकों में उत्तर प्रदेश के शहर किस पायदान पर खड़े हैं? देश के तमाम शहरों में गंदगी का साम्राज्य क्यों फैला है? क्या आम आदमी को जागरूक करने में राज्य सरकारें सफल हो सकी हैं? क्या जन व देश हित से जुड़े अभियानों और नारों को जमीन पर उतारने का काम राज्य सरकारों का नहीं है? क्या जनता के सहयोग के बिना इतने बड़े अभियान को सफल बनाया जा सकता है?
भारत सरकार ने महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। उस समय यह लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि 2019 तक देश को खुले में शौच मुक्त कर दिया जाएगा। इन वर्षों में गांवों और शहरों में व्यापक पैमाने पर शौचालय बनवाने का काम भी किया गया। शहरों की साफ-सफाई को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। इसे एक आंदोलन के रूप में चलाने की कोशिश की गई। बावजूद इसके आज भी देश पूरी तरह खुले में शौच मुक्त नहीं हो सका है। देश के तमाम शहरों में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आती है। राज्य सरकारें भी आदेश और निर्देशों तक सिमटी हुई हैं। शहरों को स्वच्छ रखने का जिम्मा नगर निगमों व नगरपालिकाओं के पास है। इसके लिए हर साल भारी भरकम बजट भी जारी किया जाता है। साफ-सफाई के लिए इनके पास कर्मचारियों की बड़ी संख्या है लेकिन स्थितियों में कोई खास अंतर नहीं आया है। कभी-कभी स्वच्छता अभियान चलाकर कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। मसलन, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बाजार से लेकर सडक़ों तक और गलियों से लेकर मुहल्लों तक में गंदगी का साम्राज्य है। कूड़ा उठान से लेकर निस्तारण तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। यही नहीं राज्य सरकारें आमजन को भी जागरूक नहीं कर सकी हैं। यही वजह है कि लोग सडक़ों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाते नजर आ जाते हैं। जाहिर है गंदगी भारत छोड़ो का यह नारा तभी सार्थक हो सकेगा जब राज्य सरकारें और जनता मिलकर स्वच्छ भारत अभियान के आंदोलन में पूरी तरह अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगी।

https://www.youtube.com/watch?v=OPoYjy_lAuQ

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