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कोरोना से ठीक हुए मरीज ही वायरस को देंगे मात

कोरोना से ठीक हुए मरीज ही वायरस को देंगे मात

गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा सेंटर शुरू
दिल्ली-चंडीगढ़ के बाद लखनऊ केजीएमयू बना पांचवां सेंटर
प्लाज्मा थेरेपी से रिकवरी दर बढ़ेगी और मृत्युदर में आएगी गिरावट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश में संक्रमण की बढ़ती रफ्तार रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह अलर्ट है। वहीं कोरोना वायरस से पीडि़त गंभीर मरीजों को बचाने के लिए स्वास्थ्य महकमा तरह-तरह के जतन कर रहा है। गंभीर मरीजों को हरसंभव सुविधा मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी के तहत यूपी के पहले प्लाज्मा सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है। लखनऊ के केजीएमयू में प्लाज्मा सेंटर की शुरूआत की गयी है। भारत का ये पांचवां प्लाज्मा सेंटर है। दिल्ली और चंडीगढ़ मे दो-दो प्लाज्मा सेंटर पहले से काम कर रहे हैं।
यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस प्लाज्मा सेंटर का उद्ïघाटन किया है। प्लाज्मा सेंटर की शुरूआत पर राज्यपाल ने कहा कि अभी तक कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं है। ऐसे में प्लाज्मा बैंक पूरे प्रदेश के मरीजों के लिए कारगर साबित होगा। प्लाज्मा थेरेपी से रिकवरी दर बढ़ेगी और मृत्युदर में गिरावट आएगी। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि प्रदेश के पहले प्लाज्मा बैंक की शुरुआत केजीएमयू में होने से टीम उत्साहित है। यहां से सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया जाएगा। पुरी के अनुसार संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए दुनियाभर के साइंटिस्ट डॉक्टरों और शोधकर्ताओं द्वारा प्लाज्मा थेरेपी को सटीक और उपयोगी बताया जा रहा है। पहले भी प्लाज्मा थेरेपी के जरिए कई वायरस और बीमारी का इलाज किया जा चुका है।

गंभीर मरीजों की जिंदगी बचेगी

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में आइजीजी एंटीबॉडी बन जाती हैं। ऐसे में प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी को गंभीर मरीजों में चढ़ाया जाता है। यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस के खिलाफ काम करती हैं। गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने में मददगार बनती हैं। कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के परिणाम अच्छे मिल रहे हैं। एक डोनर 500 एमएल तक प्लाज्मा डोनेट कर सकेगा। जिसे 200-200 एमएल की यूनिट्स में स्टोर किया जाएगा।

ये दान कर सकते हैं प्लाज्मा

कोरोना से ठीक हो चुके मरीज डिस्चार्ज होने के 14 दिन बाद जिनमें जांच के बाद एंटीबॉडी मौजूद हैं और जिनकी उम्र 18 वर्ष से 65 वर्ष के बीच हो अपना प्लाज्मा दान कर सकते हैं। एक बार में 500 एमएल प्लाज्मा निकाला जाता है। प्लाज्मा डोनेट करने वाले की पहले एचआईबी, हेमोग्लोबिन, मलेरिया, हेपेटाइटिस बी, सी, सेफलिस एवं कम्पलीट ब्लड काउंट की जांच की जाती है।

https://www.youtube.com/watch?v=-wBTwECNK0g

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