Top

ऑनलाइन शिक्षा की सीमाएं

ऑनलाइन शिक्षा की सीमाएं

sanjay sharma

सवाल यह है कि क्या ऑनलाइन शिक्षा पद्धति भारत में सफल हो सकेगी? क्या छोटे बच्चों को इस पद्धति से कुशलतापूर्वक शिक्षा दी जा सकती है? क्या ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने के लिए सभी के पास जरूरी संसाधन हैं? क्या सरकार ने इसके लिए कोई रणनीति बनाई है? क्या बेरोजगारी की मार झेल रहे अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दिलाने के लिए जरूरी इंटरनेट की सुविधा मुहैया करा सकेंगे?

चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। यहां अब तक 52 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। संक्रमण ने पूरी व्यवस्था को हिला दिया है। पूर्व की तमाम व्यवस्थाएं झटके से ध्वस्त हो गई हैं। भीड़ से बचने के लिए वर्चुअल बैठकें और वार्ताएं हो रही हैं। कोरोना ने शिक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। स्कूलों को खोलना खतरे की घंटी है। ऐसे में शिक्षा की ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। सवाल यह है कि क्या ऑनलाइन शिक्षा पद्धति भारत में सफल हो सकेगी? क्या छोटे बच्चों को इस पद्धति से कुशलतापूर्वक शिक्षा दी जा सकती है? क्या ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने के लिए सभी के पास जरूरी संसाधन हैं? क्या सरकार ने इसके लिए कोई रणनीति बनाई है? क्या बेरोजगारी की मार झेल रहे अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दिलाने के लिए जरूरी इंटरनेट की सुविधा मुहैया करा सकेंगे? क्या गांव-गांव में इंटरनेट की सेवा उपलब्ध कराए बिना इस पद्धति को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है?
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के प्रयोग पर बल देने के साथ भीड़ नहीं जुटाने पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि स्कूलों को अभी तक सरकार ने खोलने की हरी झंडी नहीं दी है। हालांकि नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को खोलने की तैयारी की जा रही है। सबसे बड़ी समस्या प्राथमिक शिक्षा को लेकर है। संक्रमण के दौरान छोटे बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है। वहीं बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प चुना गया है। कई निजी स्कूल छोटे बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे भी रहे हैं। सरकार भी इस पद्धति को अपनाने पर जोर दे रही है लेकिन इसे पूरे देश में लागू करने में बुनियादी समस्याएं हैं। ऑनलाइन शिक्षा के लिए इंटरनेट और छात्र को कम से कम एक स्मार्टफोन की जरूरत होगी। शहरों में यह कुछ हद तक संभव भी हो सकता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह संभव नहीं नजर आता है। तमाम गांवों में आज तक इंटरनेट की सुविधा नहीं पहुंच सकी है। इसके अलावा बेहतर आय का जरिया नहीं होने के कारण लोग अपने बच्चों को स्मार्टफोन दिलाने में समर्थ नहीं हैं। ऐसे में इन बच्चों को शिक्षा मिलना मुश्किल होगा। इसके अलावा छोटे बच्चे दूरस्थ शिक्षा से बेहतर तरीके से सीख नहीं पाते हैं जैसे वे कक्षा में सीखते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि वह बच्चों को बिना संक्रमण के जोखिम के शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस और कारगर उपाय अपनाए।

https://www.youtube.com/watch?v=l_JZbW-uc2U

Next Story
Share it