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ऐसे रुक चुकीं एसिड अटैक की वारदातें राजधानी में धड़ल्ले से बिक रहा तेजाब

ऐसे रुक चुकीं एसिड अटैक की वारदातें राजधानी में धड़ल्ले से बिक रहा तेजाब

हाईकोर्ट का आदेश और सरकार की गाइडलाइन की उड़ाई जा रहीं धज्जियां
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में परचून तक की दुकानों में खुलेआम बिक रहा तेजाब
न होती है निगरानी न दुकानदार ही मेंटेन रखते हैं रजिस्टर जिम्मेदार लापरवाह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गोंडा में तीन दलित बहनों पर हुए तेजाबी हमले ने एक बार फिर प्रशासन की पोल खोल दी है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में धड़ल्ले से तेजाब बेचा जा रहा है। हाल यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित तमाम परचून की दुकानों पर एसिड की खुलेआम बिक्री की जा रही है। हाईकोर्ट के आदेशों और सरकार की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। सरकारी आदेशों के बावजूद न तो तेजाब की बिक्री पर निगरानी रखी जाती है न ही दुकानदार रजिस्टर मेंटेन करते हैं। जाहिर है अपराधी आसानी से एसिड खरीदकर इसका इस्तेमाल अपराधों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र सरकार के 16 अगस्त 2013 के शासनादेश का अनुपालन कराने के लिए राज्य सरकार को तेजाब की खरीद-बिक्री को लेकर आदेश जारी किया था। शासनादेश में सभी जिला अधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को तेजाब की खरीद बिक्री को रेगुलेट किए जाने व प्रत्येक महीने की सात तारीख को इसकी जानकारी गृह मंत्रालय भारत सरकार को दिए जाने के आदेश दिए गए थे। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति सीडी सिंह की खंडपीठ ने दिया था। कोर्ट के इस आदेश का बस कुछ दिन तक पालन किया गया और बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि राजधानी समेत पूरे प्रदेश में तेजाब की खरीद-बिक्री पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सका और दुकानदार इसे खुलेआम बेचने लगे। लखनऊ के डंडइया, डालीगंज और अहियागंज बाजार समेत पुराने लखनऊ में परचून की दुकानों पर तेजाब खुलेआम बेचा जा रहा है। लोग इसका इस्तेमाल टॉयलेट की सफाई के लिए करते हैं। इसके कारण इसका इस्तेमाल बतौर हथियार अपराधी कर रहे हैं। अपराधी इसका प्रयोग खासतौर पर महिलाओं के खिलाफ करते हैं।

एसिड अटैक पीडि़ताओं के लिए क्या है प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एसिड अटैक पीडि़ताओं को राहत देने के लिए आदेश जारी किया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक कोई भी अस्पताल तेजाब हमले के पीडि़त के इलाज से मना नहीं कर सकता। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को तेजाब हमले के शिकार को फौरन कम से कम तीन लाख रुपये की मदद मुहैया करानी होगी। पीडि़त को मुफ्त इलाज मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है। मुफ्त इलाज का मतलब पीडि़त के अस्पताल के अलग कमरे, खाने और दवाइयों के साथ-साथ सर्जरी का भी खर्च सरकार करेगी। राज्य में तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया गया था।

क्या है सरकार की गाइडलाइन
द्य विक्रेता एक रजिस्टर मेंटेन करेंगे, जिसमें तेजाब का स्टॉक, खरीदार का नाम व पता, खरीदने का उद्देश्य आदि नोट किए जाएंगे।
द्य 18 साल से कम उम्र के लोगों को तेजाब नहीं बेचा जाएगा।
द्य गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर जब्तीकरण से लेकर 50 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है।
द्य तेजाब विक्रेताओं को प्रशासन की ओर से पहचान पत्र जारी किया जाएगा।
द्य स्कूल-कॉलेजों, लैब, अस्पताल, सरकारी विभागों में भी तेजाब का रिकॉर्ड रखना होगा।

खुलेआम तेजाब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आरडी पांडेय, एडीएम आपूर्ति, लखनऊ

https://www.youtube.com/watch?v=M0FNDQKVYGk

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