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आवासीय क्षेत्र में धुआं उगल रहीं फैक्ट्रियां और प्रदूषण रोकने को कागजी घोड़े दौड़ा रहे अफसर

आवासीय क्षेत्र में धुआं उगल रहीं फैक्ट्रियां और प्रदूषण रोकने को कागजी घोड़े दौड़ा रहे अफसर

चिनहट की तीन प्लाईवुड फैक्ट्रियों में रोजाना जलाई जा रहीं हजारों क्विंटल लकडिय़ां
कार्रवाई के नाम पर आख्या भेजकर झाड़ लिया पल्ला, लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक ओर आवासीय क्षेत्र में धड़ल्ले से फैक्ट्रियां धुआं उगल रही हैं वहीं दूसरी ओर प्रदूषण रोकने के नाम पर अधिकारी महज कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं। लिहाजा राजधानी में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। चिनहट में ऐसी ही तीन प्लाईवुड फैक्ट्रियां अवैध तरीके से संचालित की जा रही हैं। यहां रोजाना हजारों क्विंटल लकडिय़ां जलाई जा रही हंै और घातक केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। इससे आसपास के इलाके में प्रदूषण का खतरा गहराता जा रहा है। वहीं संबंधित विभाग कार्रवाई के नाम पर आख्या भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।
राजधानी के चिनहट थाना क्षेत्र के फैजाबाद रोड पर गुलजार कॉलोनी में तीन प्लाईवुड फैक्ट्रियां- आसाम प्लाईवुड, वुडलैंड और श्रीराम रेजिन फैक्ट्री संचालित हो रही हैं। इस इलाके को 1991 में औद्योगिक क्षेत्र से बाहर कर आवासी भूमि घोषित कर दिया गया था। बावजूद इसके यहां से फैक्ट्रियां नहीं हटाई गईं। इसके कारण क्षेत्रीय निवासियों में काफी रोष है। क्षेत्रीय निवासियों ने अवैध रूप से चल रहीं इन फैक्ट्रियों को लेकर जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर आयुक्त, कमिश्नर श्रम विभाग, पुलिस कमिश्नर, स्वास्थ्य, वन, माप तौल और आयकर विभाग सहित 14 विभागों को तीन दर्जन से अधिक बार शिकायत की लेकिन उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ। आलम यह है कि संबंधित अधिकारियों ने फैक्ट्रियों के मालिकों से मिलीभगत कर उनके पक्ष में रिपोर्ट लगाते हुए कागजों पर इन फैक्ट्रियों को देवा रोड स्थित उतर धौना में दिखा दिया है। किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने न तो मौके पर जाकर निरीक्षण करने की जरूरत समझी और न ही इस समस्या का निस्तारण कराने के आदेश दिए। राजधानी में चल रही प्लाईवुड फैक्ट्रियों में कई बार बॉयलर फटने से दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन सब में सबसे बड़ी बात यह है कि यह फैक्ट्री हाईकोर्ट से महज दो किमी पर धड़ल्ले से चल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि चिनहट में चल रही इन फैक्ट्रियों को कई वर्षों पहले ही कागजों में स्थानांतरित कर दिया गया लेकिन ये फैक्ट्रियां अभी भी उसी स्थान पर स्वतंत्र रूप से चल रही है। क्षेत्रीय निवासियों ने जब इसकी शिकायत की तो अधिकारियों ने भी गुमराह करते हुए देवा रोड का निरीक्षण करके आख्या लगा दी।

दायरे में 5 कॉलोनियां

चिनहट के जिस क्षेत्र में यह तीन फैक्ट्रियां संचालित हैं उसके एक किलोमीटर के दायरे में 5 कॉलोनियां हंै। इन कॉलोनियों में बीस हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। क्षेत्रीय निवासियों ने संबंधित अधिकारी से कई बार लिखित शिकायत की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

उड़ते रहते हैं लकडिय़ों के महीन कण

क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि फैक्ट्रियों में दिन रात लाखों टन लकडिय़ां ढोई और काटी जाती हैं। ये लकडिय़ां बहराइच के जंगलों से पेड़ों को काटकर लाया जाता है। असफाक ने बताया कि 26 तरह की लकडिय़ां यहां आती हैं जिनमें महुआ, बरगद, आम, पीपल, पाकड़, गूलर, कटहल शामिल हैं। ये पूरी तरह प्रतिबंधित हैं,लेकिन इन लकडिय़ों को काटकर प्लाई बनाई जाती है। लकडिय़ों को काटने से निकलने वाले महीन लकड़ी के कण वातावरण में उड़ते रहते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। अशफाक ने बताया कि फैक्ट्री के अंदर छह आरा मशीनें चलाई जा रही हैं। यह मशीनें चोरी की बिजली से संचालित की जा रही हैं। वहीं इन मशीनों के कारण ध्वनि प्रदूषण भी हो रहा है।

केमिकल युक्त पानी बहाया जाता है नालियों में

गुलजार कॉलोनी में स्थित इन तीन फैक्ट्रियों के बॉयलर से निकलने वाला पानी सीधे नालियों में बहा दिया जाता है। इस पानी में लिक्विड सीमेंट, फॉर्मल डी हाइड कैमिकल व एसिड का मिश्रण होता है,जिससे हानिकारक गैसें निकलती हैं।

पांच साल से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूं लेकिन सभी अधिकारी गलत रिपोर्ट लगाकर मामले को दबा देते हैं।
मुनीरुद्दीन खान, क्षेत्रीय निवासी

फैक्ट्रियों में दिन रात ट्रकों में भरकर अवैध रूप से लकडिय़ां लाई जाती हैं जिससे क्षेत्र की सडक़ें खराब हो गई हैं। यहां फैली गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है।
करुणेश मिश्रा, क्षेत्रीय निवासी

फैक्ट्रियों में आने वाले वाहनों से कई बार मेरे मकान की दीवार टूट गई। इसको लेकर मैंने क्षेत्रीय थाने कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
रामेश्वर पांडेय, क्षेत्रीय निवासी

फैक्ट्री के आसपास पांच स्कूल और एक अस्पताल भी है। फैक्ट्रियों से होने वाले शोर से एक तरफ बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता तो अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।
अशफाक अहमद, क्षेत्रीय निवासी

80 फीसदी फैक्ट्रियों को स्थानांतरित किया जा चुका है। अभी 20 फीसदी रह गई हैं। ऐसी फैक्ट्रियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। ऐसी फैक्ट्रियों को पुन: नोटिस जारी कर जल्द ही स्थानांतरित करवा दिया जाएगा ।
जेपीएस राठौर, चेयरमैन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

https://www.youtube.com/watch?v=qQyx1l7L5uU

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