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आरक्षण समाप्त करना चाहती है भाजपा सरकार: अखिलेश

आरक्षण समाप्त करना चाहती है भाजपा सरकार: अखिलेश

महंगाई, भ्रष्टïाचार और अपराधों से जनता परेशान
समाज को बांटनेवाली विधारधारा का किया जा रहा प्रचार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। संविधान दिवस के मौके पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान की उद्देशिका में जिस सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता एवं विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जिक्र है उन सबकी भाजपा राज में अनदेखी हो रही है। समाजवादी पार्टी बराबर यह मांग उठाती रही है कि जाति आधारित जनगणना हो ताकि हर समाज को संख्या बल पर सानुपातिक प्रतिनिधित्व हासिल हो सके। भाजपा इसके विरोध में है क्योंकि वह आरक्षण समाप्त करना चाहती है। डॉ. लोहिया ने पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए विशेष अवसर का सिद्धांत दिया था, भाजपा उसे लागू करना नहीं चाहती है।
उन्होंने कहा कि कैसी विडम्बना है कि आजादी के 73 वर्षों बाद भी संविधान के मूल उद्देश्यों के विपरीत आर्थिक-सामाजिक गैरबराबरी बढ़ती जा रही है। कुछ चंद घरानों में देश की पूंजी बंधक बन गई है। गरीब-अमीर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। अन्नदाता किसान बदहाल है, नौजवान के सामने भविष्य का अंधेरा है और जनसामान्य महंगाई, भ्रष्टाचार और अपराधों के बढऩे से व्याकुल है। महिलाओं और बेटियों की इज्जत खतरे में है, वे आत्महत्याएं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे ज्यादा आघात भाजपा राज में हुआ है। असहमति को देशद्रोह का तमगा दिया जाने लगा है। बच्चों को मिड-डे-मील में नमक-रोटी दिए जाने का सच दिखाने पर पत्रकार को जेल भेजा जाता है। सरकार का रवैया एकपक्षीय रूप से समाज के कमजोर वर्ग पर हमलावर जैसा है। उपासना और धार्मिक विश्वासों पर चोट की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता अखंडता की फ्रेंचाइजी एक विशेष दल ने स्वयं ले ली है। उनके मानकों से ही सबकुछ तय होता है। सत्ता दल की एकाधिकारी मानसिकता के चलते व्यक्ति की गरिमा पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और देश में आरएसएस की विघटनकारी, समाज को बांटने वाली विचारधारा का प्रचार किया जा रहा है। भाषा की मर्यादा भूलकर विद्वेषकारी बयान दिए जाते हैं। समाजवादी पार्टी का मानना है कि संविधान की उद्देशिका में वर्णित समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य को अक्षुण्ण तभी रखा जा सकता है जब हमारी पूर्णनिष्ठा और प्रतिबद्धता भी उसके प्रति हो। संविधान केवल कुछ पन्नों की पोथी नहीं है। आज की संक्रमण कालीन राजनीति में समाजवाद के रास्ते से ही समता-संपन्नता को प्राप्त किया जा सकता है। लोकतंत्र सहिष्णुता से चलता है, भाजपा समाज में कटुता और वैमनस्य बो रही है। उससे संविधान की प्रतिष्ठा और सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

हार्नबेल त्योहार में शामिल होने का दिया आमंत्रण

सपा प्रमुख अखिलेश यादव से गुरुवार को नागालैंड, तमिलनाडु, पुडुचेरी के अतिरिक्त अन्य राज्यों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने भेंट की। नागालैण्ड के जिला डिमापुर निवासी परमहंस त्रिपाठी एवं फिरोज कमल ने अखिलेश यादव को 9 दिसम्बर को नागालैंड में होने वाले हार्नबेल त्योहार में शामिल होने का आमंत्रण दिया। यह त्योहार कोहिमा और दीमापुर में धूमधाम से मनाया जाता है। हार्नबेल पर्व में नागालैंड की संस्कृति की झलक मिलती है। वहीं पार्टी मुख्यालय में खुर्जा से आए लोगों ने उनसे मुलाकात की और उन्हें मिट्टी के बर्तनों का किचन सेट भेंट किया।

https://www.youtube.com/watch?v=qQyx1l7L5uU

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