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आधी आबादी की सुरक्षा का सवाल

आधी आबादी की सुरक्षा का सवाल

sanjay sharma

सवाल यह है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या पुलिस तंत्र महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम है? क्या प्रदेश में कानून व्यवस्था बेपटरी हो गई है? क्या महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या अपराधियों के मन से कड़े कानूनों और खाकी का खौफ समाप्त हो चुका है? क्या महिला अपराधों को नजरअंदाज करने की पुलिस की प्रवृत्ति ने स्थितियों को बेकाबू कर दिया है?

पिछले कुछ दिनों में यूपी के हाथरस, बलरामपुर, लखनऊ, बुलंदशहर और आजमगढ़ में गैंगरेप और रेप की ताबड़तोड़ वारदातें हुईं। बच्चियों और किशोरियों तक को अपराधियों ने नहीं बख्शा। कुछ पीडि़ताओं की मौत हो गई जबकि कुछ जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। सवाल यह है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या पुलिस तंत्र महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम है? क्या प्रदेश में कानून व्यवस्था बेपटरी हो गई है? क्या महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या अपराधियों के मन से कड़े कानूनों और खाकी का खौफ समाप्त हो चुका है? क्या महिला अपराधों को नजरअंदाज करने की पुलिस की प्रवृत्ति ने स्थितियों को बेकाबू कर दिया है? क्या पुलिस की लापरवाही व विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया है? क्या महिला अपराधों को रोकने के लिए नई रणनीति और तंत्र बनाने की जरूरत सरकार को महसूस नहीं हो रही है?
हाथरस कांड भले सुर्खियों में हो लेकिन महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर पूरे प्रदेश की हालत बेहद खराब है। यहां आए दिन महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। रेप, गैंगरेप, छेड़छाड़, लूट, हत्या और दहेज हत्या की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। महिलाओं का अकेले घर से बाहर निकलना असुरक्षित होता जा रहा है। देर शाम महिलाएं घर से अकेले निकलने से परहेज करती हैं। इसकी बड़ी वजह पुलिस का लापरवाह रवैया है। हकीकत यह है कि पुलिस महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को अक्सर नजरअंदाज करती है। वह समय पर एफआईआर नहीं लिखती है न ही आरोपी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करती है। यही नहीं कई मामलों में वह पीडि़ता पर ही आरोपी से समझौते तक का दबाव बनाती है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। यही वजह है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। हाथरस कांड पुलिस की इसी घनघोर लापरवाही का नतीजा है। यही नहीं अपराधियों से गठजोड़ कर कई बार पुलिसकर्मी सबूतों से छेड़छाड़ करने से भी गुरेज नहीं करते हैं। लिहाजा कड़े कानूनी प्रावधानों के बावजूद अपराधियों को कड़ी सजा नहीं मिल पाती है। इसके अलावा समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और पुरुषवादी सोच भी महिला अपराधों का बड़ा कारण है। जाहिर है महिला अपराधों को रोकने के लिए सरकार न केवल नयी रणनीति व तंत्र बनाए बल्कि अपराधियों से गठजोड़ करने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई भी करे। पुलिस को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वे महिला अपराधों पर त्वरित और जरूरी कार्रवाई करे। साथ ही समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को भी समाप्त करना होगा।

https://www.youtube.com/watch?v=hwqbWD2634s

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