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अनलॉक का पांचवा चरण और आशंकाएं

अनलॉक का पांचवा चरण और आशंकाएं

sanjay sharma

सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक स्थलों पर लोग कोरोना गाइडलाइंस का ईमानदारी से पालन करेंगे? क्या इसके कारण संक्रमण के और तेजी से फैलने की आशंका नहीं है? छोटे बच्चे स्कूलों में सतर्कता का पालन कर पाएंगे? क्या कोचिंग सेंटर में बरती गई लापरवाही भारी नहीं पड़ सकती है? क्या आर्थिक गतिविधियों के संचालन के नाम पर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जाना चाहिए?

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में कोहराम मचा रखा है। यह न केवल लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बेपटरी कर चुका है। भारत में भी संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ती जा रही है। यहां अब तक 64 लाख 73 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। औसतन 70 से 80 हजार नए केस रोज सामने आ रहे हैं। कोरोना ने भारत की अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। लिहाजा सरकार चरणबद्ध तरीके से यहां विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने की छूट दे रही है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अनलॉक के पांचवें चरण में स्कूल, कोचिंग सेंटर, सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पुल और मल्टीप्लेक्स को खोलने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि इस दौरान कोरोना गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य होगा। सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक स्थलों पर लोग कोरोना गाइडलाइंस का ईमानदारी से पालन करेंगे? क्या इसके कारण संक्रमण के और तेजी से फैलने की आशंका नहीं है? छोटे बच्चे स्कूलों में सतर्कता का पालन कर पाएंगे? क्या कोचिंग सेंटर में बरती गई लापरवाही भारी नहीं पड़ सकती है? क्या आर्थिक गतिविधियों के संचालन के नाम पर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जाना चाहिए?
सरकार के अनलॉक से भले ही स्कूल, कॉलेज और सिनेमा हाल के संचालक खुश हों लेकिन यह कई शंकाओं को जन्म दे रहा है। हालांकि सभी दावा कर रहे हैं कि वे शैक्षणिक व अन्य गतिविधियों को संचालित करने के दौरान कोरोना गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य रूप से करेंगे लेकिन यह संभव नहीं दिख रहा है। स्कूल-कॉलेज खुलने पर बच्चे अपने साथियों से शायद ही पूरे समय जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर सकें। पढ़ाई के दौरान यह व्यवस्था भले संभव हो लेकिन इंटरवल के दौरान इसका पालन कराना स्कूल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। सिनेमा घरों और मल्टीप्लेक्स में भी कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन होगा, इसमें संदेह है। आज भी लोग बाजारों में जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर लोग मास्क तक पहनने से कतरा रहे हैं। इसमें दो राय नहीं कि अनलॉक पांच से आर्थिक गतिविधियों का एक और द्वार खुल जाएगा और तमाम लोगों के रोजी-रोजगार शुरू हो जाएंगे लेकिन इसके खतरे भी हैं। सबसे अधिक खतरा स्कूलों और कॉलेजों के खुलने को लेकर है। इससे बच्चों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में राज्य सरकारों को चाहिए कि वे संक्रमण की गति को देखते हुए स्कूल और कॉलेजों को खोलने को लेकर गंभीरता से चिंतन मनन करने के बाद ही फैसला लें अन्यथा संक्रमण की स्थितियां विस्फोटक हो सकती हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=1AaelIY8oZ0

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