आर्थिक सेहत पर महामारी की मार

सवाल यह है कि लंबी अवधि के लॉकडाउन का देश पर कितना असर पड़ेगा? क्या बंद आर्थिक गतिविधियां पूरे देश की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुंचा देंगी? क्या रोग से निपटने के बाद सरकार को एक नई आर्थिक व सामाजिक समस्या से जूझने के लिए अभी से तैयार रहने की जरूरत है? क्या एक बड़ी आर्थिक मंदी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है?

Sanjay Sharma

चीन से निकले घातक कोरोना वायरस ने भारत समेत पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन, इटली, ईरान के बाद अब अमेरिका इस महामारी का बड़ा केंद्र बन गया है। भारत में कोरोना पीडि़तों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस वायरस के कम्युनिटी विस्फोट को रोकने के लिए भारत की केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन कर दिया है। इस लॉकडाउन ने पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। सवाल यह है कि लंबी अवधि के लॉकडाउन का देश पर कितना असर पड़ेगा? क्या बंद आर्थिक गतिविधियां पूरे देश की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुंचा देंगी? क्या रोग से निपटने के बाद सरकार को एक नई आर्थिक व सामाजिक समस्या से जूझने के लिए अभी से तैयार रहने की जरूरत है? क्या एक बड़ी आर्थिक मंदी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है? क्या वैश्विक सुधार के बिना भारत की आर्थिक सेहत में सुधार हो पाएगा? क्या ग्लोबल गांव बन चुकी दुनिया को कोरोना वायरस ने पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया है?
कोरोना वायरस की जब तक दवा उपलब्ध नहीं हो जाती है तब तक इसको नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय सामाजिक दूरी है। यह दूरी तभी हो सकती है जब सरकार सारी गतिविधियों को ठप कर दे। दुनिया भर की सरकारें इसी राह पर चल रही हैं। ग्लोबल गांव बन चुकी दुनिया को कोरोना वायरस से पूरी तरह लहूलुहान कर दिया है। तमाम देशों ने खुद को अन्य देशों से अलग-थलग कर दिया है। आयात-निर्यात तक पर प्रतिबंध लग चुका है। सीमाएं सील कर दी गई हैं। यही नहीं देश के अंदर भी स्थितियां बेहद जटिल हो गई हैं। जिलों और राज्यों में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। रेल और हवाई सफर को बंद कर दिया गया है। कारखानों, मॉल्स और दुकानों समेत आर्थिक गतिविधियों के तमाम प्रतिष्ठïान बंद कर दिए गए हैं। लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो गई है। तमाम लोग बेरोजगार हो चुके हैं। गरीबों के सामने खाने के लाले पड़ गए हैं। छोटे दुकानदार और फुटकर व्यापारियों का धंधा चौपट हो गया है। कारखानों में उत्पादन ठप है। यदि यह लॉकडाउन लंबे समय तक चला तो हालात कहां पहुंचेंगे, इसकी कल्पना भी शायद नहीं की जा सकती है। ग्लोबल दुनिया जब तक एक बार फिर पुराने ढर्रे पर नहीं पहुंचती है तब तक स्थितियों में सुधार नहीं होंगे। कुल मिलाकर यह वायरस न केवल भारत समेत विश्व की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहा है बल्कि आने वाले दिनों में एक नए प्रकार के सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को भी उत्पन्न कर रहा है, जिससे निपटने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर काम करना होगा।

https://www.youtube.com/watch?v=3s3i8pIMikc

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