देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना नवरात्रि

 

वरात्रि भारतवर्ष में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्रि आते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पडऩे वाली नवरात्रि काफी लोकप्रिय हैं। बसंत ऋ तु में होने के कारण चैत्र नवरात्रि को बासंती नवरात्रि तो शरद ऋ तु में आने वाले आश्विन मास की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि भी कहा जाता है। चैत्र और आश्विन नवरात्रि में आश्विन नवरात्रि को महानवरात्रि कहा जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि ये नवरात्रि दशहरे से ठीक पहले पड़ती हैं। दशहरे के दिन ही नवरात्रि को खोला जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रुपों की पूजा को शक्ति की पूजा के रूप में भी देखा जाता है। मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रूप हैं। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा व उपवास किया जाता है। दसवें दिन कन्या पूजन के पश्चात उपवास खोला जाता है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पडऩे वाली नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। हालांकि गुप्त नवरात्रि को आमतौर पर नहीं मनाया जाता लेकिन तंत्र साधना करने वालों के लिये गुप्त नवरात्रि बहुत मायने रखती है। इसमें तंत्र साधक देवी मां की साधना करते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=UoL9yZykyd4

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