पानी की बर्बादी जारी, हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदार

शहर के 45फीसदी हिस्सों में जलस्तर 30 से 45 मीटर नीचे पहुंचा
वाहन धुलाई में रोज बहाया जा रहा लाखों लीटर पानी
वाटर प्लांट लगातार कर रहे भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में चार दशक के बीच अलग-अलग इलाकों का जलस्तर 20 से 40 मीटर तक गिर चुका है। पहले महज दस मीटर की गहराई पर पानी मिल जाता था, लेेकिन पानी की लगातार बर्बादी के कारण शहर के 45 फीसदी हिस्सों का जलस्तर 30 से 45 मीटर तक पहुंच चुका है। शहर में पानी की बर्बादी को लेकर कोई सख्ती नहीं हैं। लोग पानी का व्यावसायिक प्रयोग कर रहे हैं। गाड़ी धुलाई, वाटर प्लांट, पानी टैंकर समेत पानी के तमाम धंधों के कारण जलस्तर गिरता जा रहा है। वहीं, शहर वॉटर हार्वेस्टिंग का इंतजाम पूरी तरह से फेल हो चुका है।
लखनऊ में पिछले पांच साल से जलस्तर प्रति वर्ष 1 से 1.7 मीटर तक घट रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और शहर के लोग पानी बर्बाद करने से बाज नहीं आ रहे। जलकल के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ज्यादातर लोग सप्लाई के पानी का सिर्फ 50 फीसदी हिस्सा जरूरी काम में इस्तेमाल करते हैं। बाकी 50 फीसदी पानी सडक़ों और गाड़ी की धुलाई जैसे गैरजरूरी काम में इस्तेमाल होता है। फैजुल्लागंज निवासी अमित चौधरी ने बताया कि उनके यहां एक दिन अमूमन 40 से 50 गाडिय़ों की धुलाई होती है। एक कार धुलने में कम से कम 200 लीटर पानी खर्च होता है। यही हाल शहर के सैकड़ों वाहनों के वर्कशाप का है। एक अनुमान के मुताबिक, शहर में कारों की धुलाई के लिए 200 से ज्यादा सेंटर हैं, जहां रोजाना लाखों लीटर बर्बाद होता है। वहीं शहर में सीमावर्ती क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में मिनिरल वाटर प्लांट खुल गए हैं जहां रोजाना लाखों लीटर पानी सबमर्सिबल पंप के जरिए निकाला जा रहा है और इस पानी को शहर के तमाम हिस्सों में सप्लाई किया जाता है व प्लांट संचाालक मोटी कमाई कर रहे हैं।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का इंतजाम नहीं

शहर में 300 वर्ग मीटर या इससे बड़ी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना जरूरी है। नियम के मुताबिक, इसके बिना एलडीए से नक्शा पास नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद शहर में बन रही इमारतों में इसका इंतजाम नहीं किया जा रहा। यहां तक कि जवाहर भवन, इंदिरा भवन और सचिवालय समेत कई सरकारी इमारतों में यह सिस्टम बना है, लेकिन काम नहीं करता है।

10 लाख की आबादी पानी के लिए परेशान

एक तरफ शहर में रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, वहीं शहर में करीब दस लाख लोग पानी के लिए परेशान हैं। पुराने शहर और कई झुग्गी बस्तियों में गर्मी के दिनों में तो सुबह चार बजे से ही पानी के लिए लाइन लगने लगती है। हर साल आशियान, फैजुल्लागंज और मडिय़ांव में लोगों को पानी की समस्या झेलनी पड़ती है।

नहीं हो रही सख्ती
शहर में कितने घरों में निजी ट्यूबवेल हैं और भूजल का कितना दोहन किया जा रहा है, इसका कोई डेटा किसी सरकारी विभाग के पास नहीं है। कहने को घरों में बोरिंग या ट्यूबवेल पर पाबंदी है लेकिन इसेे रोकने के लिए कोई सख्त नियम नहीं है।

https://www.youtube.com/watch?v=smTtNPIIInw

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