संकट काल में लापरवाही पड़ सकती है महंगी

सवाल यह है कि क्या देश के नागरिक इस महामारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं? क्या विश्व के तमाम देशों में कोरोना वायरस से हो रही हजारों लोगों की मौतों के बाद भी भारतीय सबक सीखने को तैयार नहीं है? क्या संकट काल के समय नागरिकों को अपने कर्तव्यों का बोध नहीं है? क्या दूसरे के जीवन को संकट में डालने का अधिकार किसी को दिया जा सकता है?

Sanjay sharma

कोरोना वायरस भारत में तेजी से पांव पसार रहा है। अब तक चार सौ से अधिक लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं जबकि आठ लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण को रोकने के लिए कई राज्यों को लॉकडाउन कर दिया गया है। लोगों को सोशल डिस्टेंस बनाने और घरों में रहने के लिए कहा गया है। बावजूद इसके कई राज्यों में लोगों ने सरकार के निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया। लिहाजा महाराष्टï्र व पंजाब सरकार को कफ्र्यू लगाना पड़ा। खुद प्रधानमंत्री को इस मामले में सख्ती बरतने की सलाह राज्य सरकारों को देनी पड़ी। सवाल यह है कि क्या देश के नागरिक इस महामारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं? क्या विश्व के तमाम देशों में कोरोना वायरस से हो रही हजारों लोगों की मौतों के बाद भी भारतीय सबक सीखने को तैयार नहीं है? क्या संकट काल के समय नागरिकों को अपने कर्तव्यों का बोध नहीं है? क्या दूसरे के जीवन को संकट में डालने का अधिकार किसी को दिया जा सकता है? क्या देश के प्रति नागरिकों का कोई कर्तव्य नहीं है? क्या भारतीय समाज आत्म अनुशासन को भूल चुका है? क्या बिना बल प्रयोग के लॉकडाउन को सफल नहीं बनाया जा सकता ?
आज पूरा विश्व कोरोना की चपेट में हैं। भारत में भी यह लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल बचाव ही इसका इलाज है। यह बचाव भी सामाजिक दूरी बनाने से संभव हो सकता है। जब तक कोरोना वायरस की चेन नहीं टूटेगी, इसका संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता जाएगा। जिस तेजी से भारत में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे कोरोना तीसरे स्टेज के करीब पहुंचता दिख रहा है। सरकारी मशीनरी इसको रोकने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। सोशल डिस्टेंस को बनाए रखने के लिए जनता कफ्र्यू लगाया गया और फिर उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्टï्र, दिल्ली समेत कई राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा की गई। लोगों को घर में रहने के लिए कहा गया। विभिन्न माध्यमों के जरिए लॉकडाउन का महत्व बताया जा रहा है। बावजूद इसके कई राज्यों में नागरिक निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वे सडक़ों पर घूम रहे हैं। यह जानते हुए कि यदि बीमारी कम्युनिटी लेवल पर पहुंच गयी तो इसको रोकना देश के चिकित्सा तंत्र के बाहर होगा। फिलहाल कम्युनिटी ट्रांसमिशन अभी नहीं हुआ है, यदि ऐसा हो गया तो भारत की हालत इटली से भी बदतर हो जाएगी। देश की सारी व्यवस्थाएं चरमरा जाएंगी। जाहिर है इस संकट से तभी निपटा जा सकता है जब नागरिक अपने कर्तव्यों को समझें और सरकार के दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन करें। थोड़ी सी लापरवाही देश की 135 करोड़ जनसंख्या पर भारी पड़ जाएगी।

https://www.youtube.com/watch?v=3s3i8pIMikc

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