बढ़ती कालाबाजारी और सरकारी तंत्र

सवाल यह है कि कालाबाजारी अचानक तेज क्यों हो गई है? सरकार की तमाम हिदायतों के बावजूद लोग बेसब्र क्यों हो गए? बंदी के नाम पर अफरातफरी का माहौल क्यों पैदा हुआ? सरकार इस कालाबाजारी पर नियंत्रण लगाने में नाकाम क्यों हो रही है? संकट की इस घड़ी में इस प्रकार की कालाबाजारी क्या सभ्य समाज के लिए धब्बा नहीं है?

sanjay sharma

चीन से निकलकर घातक कोरोना वायरस ने लगभग पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। यूरोप, भारत व अमेरिका में लॉकडाउन हो गया है। यह वायरस भारत में भी तेजी से फैल रहा है। महाराष्टï्र, केरल और उत्तर प्रदेश में दर्जनों केस मिल चुके हैं। कई राज्यों में लॉकडाउन कर दिया गया है। इसी के साथ देश में खाद्य पदार्थों से लेकर मास्क, सेनेटाइजर और ग्लब्स की कालाबाजारी तेज हो गई है। जनता कफ्र्यू और लॉकडाउन से पूरे देश में कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है। दुकानदार मुनाफा कमाने में जुट गए हैं। सवाल यह है कि कालाबाजारी अचानक तेज क्यों हो गई है? सरकार की तमाम हिदायतों के बावजूद लोग बेसब्र क्यों हो गए? बंदी के नाम पर अफरातफरी का माहौल क्यों पैदा हुआ? सरकार इस कालाबाजारी पर नियंत्रण लगाने में नाकाम क्यों हो रही है? संकट की इस घड़ी में इस प्रकार की कालाबाजारी क्या सभ्य समाज के लिए धब्बा नहीं है? क्या लोगों के कष्टïों को भुनाना अपराध नहीं है?
कोरोना वायरस के बढ़ते केस से भारत में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। अचानक ग्लब्स, सेनेटाइजर और मास्क की मांग बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में कई लोगों ने न केवल नकली मास्क और सेनेटाइजर बाजार में खपाना शुरू कर दिया है बल्कि इसके लिए मुंहमांगी कीमत भी वसूल रहे हैं। पिछले दिनों कई क्षेत्रों में छापेमारी के दौरान लाखों के नकली सेनेटाइजर और मास्क बरामद भी किए गए। बावजूद इसके बाजार में इनकी खपत बनी हुई है। कठोर कानूनों के बावजूद कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। वे बाकायदा डर का बाजार पैदा कर लोगों को चूना लगा रहे हैं। कोरोना वायरस के प्रकोप के साथ तमाम तरीके के इम्यून सिस्टम को बढ़ाने वाली दवाएं बाजार में बिकने लगी हैं। हालांकि ये कितनी कारगर हैं, इसकी पुष्टिï अभी तक नहीं हो सकी है लेकिन डरे हुए लोग इन दवाओं को खरीद रहे हैं। इसी तरह मॉल्स बंद होने की सूचना के बाद लोगों में खाद्यान्न की कमी का डर पैदा हो गया। इसका फायदा भी मुनाफाखोर उठा रहे हैं। लोग महीनों का राशन लेने के लिए मॉल्स और दुकानों पर पहुंच गए और कई गुना महंगी कीमत पर खरीदारी की। इस परिस्थितियों से साफ है कि आधुनिकता और भौतिकवाद की अंधी दौड़ में मानवता और सहयोग की भावना गुम हो चुकी है। यह किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार को कड़ाई से पेश आना होगा। ऐसे मुनाफाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि यह दूसरों के लिए सबक साबित हो। यदि इसे नहीं रोका गया तो अफरातफरी उत्पन्न हो जाएगी।

https://www.youtube.com/watch?v=3s3i8pIMikc

Loading...
Pin It