यातायात व्यवस्था, सडक़ हादसे और सरकारी तंत्र

सवाल यह है कि प्रदेश में सडक़ हादसों पर लगाम क्यों नहीं लग रही है? क्या चरमराती यातायात व्यवस्था के कारण स्थिति बेकाबू हो चुकी है? क्या सडक़ों की बनावट और यातायात नियमों का उल्लंघन इसकी प्रमुख वजह है? क्या सडक़ों के निर्माण में हो रही धांधली हादसों की वजह है? कड़े कानूनों के बावजूद लोग यातायात नियमों की धज्जियां क्यों उड़ा रहे हैं?

Sanjay Sharma
सुल्तानपुर में बेकाबू बस ने एक दर्जन से अधिक लोगों को रौंद दिया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई जबकि दस घायल हो गए। यह एक बानगी है। आलम यह है कि उत्तर प्रदेश में आए दिन सडक़ हादसे हो रहे हैंं। हर साल हजारों लोग हादसों में मारे जा रहे हैं। कई हमेशा के लिए विकलांग हो चुके हैं। सवाल यह है कि प्रदेश में सडक़ हादसों पर लगाम क्यों नहीं लग रही है? क्या चरमराती यातायात व्यवस्था के कारण स्थिति बेकाबू हो चुकी है? क्या सडक़ों की बनावट और यातायात नियमों का उल्लंघन इसकी प्रमुख वजह है? क्या सडक़ों के निर्माण में हो रही धांधली हादसों की वजह है? कड़े कानूनों के बावजूद लोग यातायात नियमों की धज्जियां क्यों उड़ा रहे हैं? ट्रैफिक पुलिस क्या कर रही है? क्या लोगों के जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या पूरा सिस्टम ही लचर और लापरवाह हो चुका है?
प्रदेश में सडक़ हादसों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इसकी कई वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह खुद लचर सरकारी तंत्र है। सडक़ों के निर्माण में जमकर धांधली हो रही है। अधिकांश सडक़ें हल्की बारिश में ही उखड़ जाती हैं। उन सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं। ये गड्ढे हादसों का कारण बन रहे हैं। खुद सुप्रीम कोर्ट सडक़ों में पड़े गड्ढों पर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। बावजूद इसके सरकारी तंत्र ने इस संदर्भ में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। तमाम दावों के बावजूद सडक़ें गड्ढामुक्त नहीं हो सकीं। सडक़ों पर टै्रफिक पुलिस के जवान नहीं दिखाई पड़ते हैं। सिग्नल सिस्टम अस्त-व्यस्त है। जहां सिग्नल सिस्टम हैं भी वहां आने-जाने वाले लोग इसके मुताबिक नहीं चलते हैं। स्पीड ब्रेकर बिना मानक के बनाए गए हैं। इसके कारण कई बार ये हादसों का कारण बन रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक हादसों में सबसे अधिक दोपहिया चालकों की मौत होती है। दोपहिया चालक सडक़ पर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हैं। चेंकिंग अभियान के दौरान ही ये हेलमेट लगाते हैं। यही नहीं फर्राटा भर रहे ये दोपहिया वाहन चालक कई बार रेड सिग्नल को भी जंप कर जाते हैं। हाईवे की हालत और भी खराब है। यहां अधिकांश हादसे तेज स्पीड के कारण होते हैं। अधिकांश वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का ध्यान नहीं रखते हैं। इसके अलावा मोबाइल पर बात करते हुए और शराब पीकर वाहन चलाने के कारण भी हादसे हो रहे है। यदि सरकार हादसों पर नियंत्रण लगाना चाहती है तो उसे न केवल यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा बल्कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करनी होगी। इसके अलावा सडक़ों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा।

https://www.youtube.com/watch?v=ukNKx24hMIQ

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