राज्यसभा में हंगामा करने पर माननीयों से छिन सकता है वोटिंग का अधिकार

  • उच्च सदन की कमेटी ने 77 नियमों में संशोधन का प्रस्ताव किया पेश
  • 124 नये नियमों को लागू करने की सिफारिश
  • वेल में आकर हंगामा करने वाले सांसद सदन की कार्यवाही से हो सकते हैं निलंबित

 

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यसभा में हंगामा करना अब माननीयों को महंगा पड़ सकता है। उच्च सदन की कमेटी ने ऐसी सिफारिशें की हैं जिनके अमल में आने के बाद हंगामा करने वाले सांसदों से विधेयक पर वोटिंग का अधिकार छीना जा सकता है। सदन की जनरल पर्पज कमेटी ने कार्यवाही को सुचारू ढंग से चलाने के लिए 124 नए नियमों का लागू करने के साथ ही 77 नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है।
राज्य सभा में नए नियम अगर लागू होते हैं तो लोकसभा की तरह वेल में आकर हंगामा करने वाले सांसद सदन की कार्यवाही से निलंबित हो सकते हैं। साथ ही उन्हें 5 दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर रहना पड़ सकता है। अब यह कमेटी नियमों से जुड़ी कमेटी को अपने प्रस्ताव सौंपेगी जिसके बाद इन्हें लागू करने पर विचार किया जाएगा। नए नियमों में हंगामा करने वाले सांसद से वोटिंग अधिकार छीनने और उसे गैरमौजूद की श्रेणी में लागू का प्रस्ताव भी शामिल है।

सभापति की बातें नहीं मानने को लेकर कमेटी गंभीर

राज्यसभा में गतिरोध एक बड़ी समस्या है और संख्याबल में लोकसभा के मुकाबले ज्यादा मजबूत विपक्षी सांसद आए दिन उच्च सदन में हंगामा करते दिख जाते हैं। सभापति वेंकैया नायडू के ओर से बीते कई सत्रों में व्यवधान खत्म करने, सदन को सुचारू ढंग से चलाने के लिए सांसदों से मदद की अपील की गई है लेकिन सीएए जैसे मुद्दों पर उस अपील का असर नहीं दिखा और सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला था। इसलिए सभापति की बात नहीं मानने वाले माननीयों को लेकर कमेटी काफी गंभीर है।

मई 2018 में हुआ था कमेटी का गठन

सभापति वेंकैया नायडू ने मई 2018 में ही नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जिसमें राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री और कानून मंत्रालय के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी दिनेश भारद्वाज शामिल थे। इस कमेटी ने करीब 51 बैठकों के बाद नए नियमों का प्रस्ताव दिया है। कमेटी की ओर से मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई और उनके कार्यान्वयन पर विचार किया गया, तब जाकर कमेटी की ओर से यह सिफारिशें सामने आई हैं। इसके बाद सभापति और उपसभापति हरिवंश ने राजनीतिक दलों के सामने यह सुझाव रखे हैं जिन्हें सभी की सहमति के बाद लागू किया जा सकता है।

उपहार सिनेमा कांड में अंसल बंधुओं को सुप्रीम कोर्ट से राहत

  • पीडि़तों की ओर से दायर क्यूरेटिव पिटीशन को किया खारिज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली के उपहार सिनेमा कांड में अंसल बंधुओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने पीडि़तों की ओर से दायर क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इन याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया है। इस फैसले से साफ है कि अब रियल एस्टेट कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल जेल नहीं जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि क्यूरेटिव याचिकाओं में कोई आधार नहीं है, यानी क्यूरेटिव याचिकाएं खारिज होने के बाद स्पष्ट हो गया कि अंसल बंधुओं पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। कोर्ट ने अंसल बंधुओ पर 2015 में 30 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया था। पीडि़तों ने अंसल बंधुओ को जेल भेजने की मांग भी की थी। बता दें, जून 1997 में दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने से 23 बच्चों समेत 59 लोगों की मौत हो गई थी। उपहार मालिकों ने अधिक पैसा कमाने के लिए सिनेमा हॉल में लाइसेंस से तय सीटों से ज्यादा सीटें लगा रखी थीं। इससे आने-जाने का रास्ता संकरा हो गया था। आग लगने के बाद इसी वजह से लोग निकल नहीं पाए और दम घुटने से मारे गए। इस कांड के दोषी सुशील अंसल की उम्र और बीमारी के चलते सजा माफ करने का फैसला भी बरकरार है। क्यूरेटिव पिटीशन पर चेंबर में चीफ जस्टिस एस.ए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की और पिटीशन को खारिज कर दिया।

राष्ट्रवाद शब्द में हिटलर की झलक: भागवत

  • कहा, भारत को विश्वगुरू बनाना हमारा लक्ष्य

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने रांची में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राष्ट्रवाद जैसे शब्द में नाजी और हिटलर की झलक दिखाई पड़ती है। आरएसएस का विस्तार देश के लिए है, क्योंकि हमारा लक्ष्य भारत को विश्वगुरू बनाना है। इसलिए हम हिन्दुत्ववादी विचारधारा को मानते हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसका मतलब नाजी या हिटलर से निकाला जा सकता है, ऐसे में राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों को ही प्रमुखता से इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने इस वक्त आईएसआईएस, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती हैं। इन चुनौतियों से सिर्फ भारत ही निजात दिलवा सकता है। इसलिए हिंदुस्तान को दुनिया का नेतृत्व करने के बारे में सोचना चाहिए। यह भी कहा कि हिंदू ही एक ऐसा शब्द है जो भारत को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करता है। भले ही देश में कई धर्म हों, लेकिन हर व्यक्ति एक शब्द से जुड़ा है जो हिंदू है। ये शब्द ही देश के कल्चर को दुनिया के सामने दर्शाता है। इसलिए संघ हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ता रहेगा।

https://www.youtube.com/watch?v=QB-DLNUL5Bo

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