बेमिसाल कला मंदिरों की धरती है खजुराहो

श्वनाथ मंदिर के आगे चित्रगुप्त मंदिर सूर्यनारायण को समर्पित है। मंदिर की दीवारों पर अन्य मूर्तियों के मध्य उमा-महेश्वर, लक्ष्मी-नारायण और विष्णु के विराट रूप में मूर्तियां भी हैं। जनजीवन की मूर्तियों में पाषाण ले जाते श्रमिकों की मूर्तियां मंदिर निर्माण के दौर को दर्शाती हैं। वह दिन आज भी मेरे स्मृति पटल पर तैर जाता है जब अपने मित्रों के साथ झांसी से प्रात: बस से रवाना होकर करीब चार धंटे का सफर तय कर विश्व में बेमिसाल कला के प्रतिमान मंदिरों की धरती खजुराहो पर कदम रखा था। मंदिरों के आसपास ही ठहरने की व्यवस्था है। यहां अल्पाहार कर हम मंदिरों के दर्शन के लिए निकल पड़े।

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