सीएम योगी ने कहा फील्ड में तैनात करो ईमानदार अफसरों को, हाकिमों ने एसपी बना दिया भ्रष्टाचार के आरोप में जेल होकर आए अफसर को

  • एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर से नाम निकालने के आरोप में जेल जा चुके नेपाल सिंह को बनाया गया मुजफ्फरनगर का एसपी देहात
  • नेपाल सिंह की तैनाती से हुआ साबित कि कोई तो है जो तबादलों में कर रहा है खेल

संजय शर्मा
लखनऊ। सीएम योगी एक नहीं कई मौकों पर कह चुके हैं कि जिलों में ईमानदार अफसरों को तैनात किया जाये मगर हाकिम हैं कि सीएम की बात सुनने को तैयार ही नहीं हैं। पूर्व में भी जिलों में पैसे लेकर तैनाती का आरोप लगता रहा है मगर एक नये मामले ने इस भ्रष्टाचार के खेल को और उजागर कर दिया है। सीएम के आदेश को ताक पर रखकर मुजफ्फरनगर में एसपी ग्रामीण के पद पर नेपाल सिंह को तैनात कर दिया है, जो एससी-एसटी एक्ट के एक झूठे मुकदमे में नाम निकलवाने के नाम पर 10 लाख रुपये मांग रहे थे। इस मामले में उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने जेल भेजा था। जाहिर है जो अफसर भ्रष्टाचार के मामले में जेल गया हो उसे इस तरह जिले में तैनाती पूरी व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मामले में सीएम की जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े करती है। विपक्ष ने इस मामले पर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उत्तर प्रदेश के पुलिस अफसर पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। एक अश्लील वीडियो के वायरल होने के बाद तत्कालीन एसएसपी नोएडा वैभव कृष्ण ने यह आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी कि उत्तर प्रदेश में ट्रांसफर पोस्टिंग में पैसा चलता है। इस मामले में पूरे देश भर में सरकार की तीखी आलोचना हुई थी। सीएम योगी ने इस पर कड़े तेवर दिखाते हुए वैभव कृष्ण को निलंबित कर दिया था और पांच आईपीएस अफसरों की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया था।
इसी बीच मुजफ्फरनगर के एसपी देहात नेपाल सिंह की तैनाती भी चर्चाओं के घेरे में आ गई है। लोग हैरान हंै कि जिस अफसर को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजा गया हो उसे मुजफ्फरनगर जैसे जिले की कमान कैसे दी जा सकती है? ये मामला 2006 में हाथरस में हुआ था, जहां पर प्रतिष्ठित डॉक्टर एससी गुप्ता पर साजिशन एससी-एसटी एक्ट का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन सीओ नेपाल सिंह ने एफआईआर से नाम निकालने के एवज में 10 लाख रुपये मांगे थे, जिसका स्ट्रिंग ऑपरेशन हो गया था। जांच एसएसपी आगरा दीपेश जुनेजा ने की थी और नेपाल सिंह के सरेंडर करने पर स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट संख्या-2 के जज मंजीत सिंह ने उन्हें जेल भेज दिया था। मगर नेपाल सिंह जानते थे कि अगर जेब में दाम हों तो बड़े अफसर मैनेज होकर मुजफ्फरनगर जैसा कमाई वाला जिला दिलवा सकते हैं। नेपाल सिंह की तैनाती पूरे सिस्टम और सीएम की इच्छाओं पर हाकिमों की मनमर्जी साबित करती है।

भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति में कितनी सच्चाई है, इस बात की हकीकत ऐसे पुलिस अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों में तैनाती देने से स्पष्ट होती है। यह सरकार सिर्फ दिखावे की राजनीति कर रही है।
वीरेन्द्र मदान, प्रवक्ता, कांग्रेस

सीएम की मंशा साफ है। क्राइम और करप्शन में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। किन परिस्थितियों में तैनाती हुई है, इसको देखने की आवश्यकता है। यदि सीएम की मंशा के विपरीत तैनाती हुई है तो सीएम अवश्य संज्ञान में लेंगे।
मनीष शुक्ला, प्रवक्ता, भाजपा

भाजपा जो कहती है वो करती नहीं है और जो करती है वो कहती नहीं है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बात ईमानदारी की करती है, लेकिन जो सबसे अधिक भ्रष्टाचारी हैं वो सरकार के उतने ही करीबी हैं।
सुनील सिंह साजन, एमएलसी, सपा

भ्रष्टïाचार के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति हास्यास्पद है। ऐसा व्यक्ति जो जांच में दोषी पाया गया हो उसे मुजफ्फरनगर जैसे जिले के ग्रामीण क्षेत्र का कप्तान बनाया जाना बेहद शर्मनाक है। यह सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।
वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता, आप

लखनऊ जिला न्यायालय में वकील पर बम से हमला, हडक़ंप

  • कई अन्य अधिवक्ता घायल, तीन जिंदा बम मौके से बरामद
  • प्रियंका ने साधा निशाना, कहा वकीलों पर हो रहे बम से हमले

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश में बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। बेखौफ बदमाश अब कचहरी परिसर में भी वारदात को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिला सत्र न्यायालय में आज दोपहर बदमाशों ने बम से हमला कर दिया। हमला लखनऊ बार एसोसिएशन के संयुक्त मंत्री संजीव लोधी पर किया गया जिसमें वे घायल हो गए। वहीं बम फटने से कई अन्य वकील भी जख्मी हो गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने तीन जिंदा बम मौके से बरामद किए गए।
लखनऊ जिला सत्र न्यायालय के गेट नंबर तीन पर कुछ बदमाशों न बम से लखनऊ बार एसोसिएशन के संयुक्त मंत्री संजीव लोधी पर हमला कर दिया। हमला सीजेएम कोर्ट में हुआ। पुलिस के मुताबिक एक बम फटा जिससे मौके पर मौजूद संजीव लोधी समेत कई अन्य वकील घायल हो गए। वहीं बदमाश घटना अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। वकीलों में घटना को लेकर आक्रोश व्याप्त है। डीसीपी वेस्ट, एडीसीपी वेस्ट और एसएचओ मौके पर पहुंचे। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब यहां वकीलों पर बम से हमले हो रहे हैं।

बताना होगा, क्यों दिया दागी को टिकट: सुप्रीम कोर्ट

  • वेबसाइट व अन्य माध्यमों के जरिए बताना होगा आपराधिक रिकॉर्ड

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों से आपराधिक रिकॉर्ड के उम्मीदवारों को चुनाव का टिकट दिए जाने की वजह बताने का आदेश दिया है।
जस्टिस रोहिंटन नरीमन और एस रविंद्र भट की बेंच ने कहा कि सभी पार्टियों को अपने उम्मीदवारों का क्रिमिनल रिकॉर्ड अपने आधिकारिक वेबसाइट, फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर अपलोड करना होगा। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। अगर पार्टियां क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले शख्स को चुनावी टिकट देती है, तो पार्टियां इसकी वजह भी बताएंगी। इसकी सूचना चुनाव आयोग को भी देनी होगी।

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