ट्रेनों की रफ्तार और रेलवे का लचर तंत्र

सवाल यह है कि क्या देश में हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन करने के लिए रेलवे के ट्रैक सुरक्षित हैं? क्या रेल हादसों को रोकने के कोई पुख्ता इंतजाम किए जा सके हैं? क्या पुरानी तकनीकी से हाई या सेमी स्पीड ट्रेनों को संचालित किया जा सकता है? क्या जर्जर हो चुके तमाम टै्रकों को बदलने की जरूरत नहीं है?

Sanjay sharma
भारतीय रेलवे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। देश में 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौडऩे वाली हाई स्पीड ट्रेनों के इंजन और कोच तैयार किए जाएंगे। इसके साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने का भी वादा किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या देश में हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन करने के लिए रेलवे के ट्रैक सुरक्षित हैं? क्या रेल हादसों को रोकने के कोई पुख्ता इंतजाम किए जा सके हैं? क्या पुरानी तकनीकी से हाई या सेमी स्पीड ट्रेनों को संचालित किया जा सकता है? क्या जर्जर हो चुके तमाम टै्रकों को बदलने की जरूरत नहीं है? क्या यात्रियों की सुरक्षा की व्यवस्था करने में रेलवे अभी तक सफल हो पाया है? रेलवे में सुधार के लिए बनाई गई कमेटियों की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया है? क्या रेलवे को अत्याधुनिक तकनीकी से लैस किए बिना ऐसी ट्रेनों को संचालित करना खतरे से खाली होगा?
भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा बड़ा रेल नेटवर्क है। ट्रेनों के जरिए लाखों लोग रोजाना एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते हैं। वहीं मालगाड़ी के जरिए लाखों टन सामान भेजा जाता है। जीडीपी में रेलवे का अहम योगदान है। बावजूद इसके आज तक रेलवे को पूरी तरह अत्याधुनिक तकनीक से लैस नहीं किया जा सका है। तमाम रेलवे फाटक मानव विहीन हैं। ट्रैकों की हालत जर्जर हो चुकी है। कई रेलवे पुल भी जर्जर हो चुके हैं। इन्हीं ट्रैकों से रोजाना तमाम ट्रेनें गुजरती हैं। टै्रक के टूटने के कारण कई हादसे भी हो चुके हैं। इसके अलावा हाईटेक सिग्नल सिस्टम नहीं होने के कारण हादसों पर नियंत्रण लगाना मुश्किल हो गया है। सिग्नल सिस्टम में गड़बड़ी के कारण कई बड़े ट्रेन हादसे हो चुके हैं और हजारों लोग मारे जा चुके हैं। ट्रैक के जर्जर होने का एक बड़ा कारण मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों का एक ही टै्रक पर लगातार हो रहा संचालन है। इसके अलावा रेलवे में सुधार के लिए कई कमेटियों की रिपोर्ट पर आज तक काम नहीं किया गया है। कुछ स्टेशनों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में साफ-सफाई तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। स्टेशनों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। टै्रक की निगरानी में भी लापरवाही बरती जा रही है। ऐसी स्थिति में हाई स्पीड या सेमी स्पीड ट्रेनों का संचालन करना सपना देखने जैसा ही साबित होगा। यदि रेलवे हाई स्पीड या सेमी स्पीड ट्रेनों का संचालन करना चाहती है तो उसे पूरे रेलवे संचालन तंत्र को दुरुस्त करना होगा। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। बिना हाईटेक और फुल प्रूफ सुरक्षा व्यवस्था के ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना खतरनाक साबित हो सकता है। लिहाजा सरकार को भी इस पर ध्यान देना होगा

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