दिल्ली चुनाव से बदलेगी तस्वीर

शाहीनबाग को एक छोटा धरना न बताकर पूरे देश की प्रयोगशाला तक बता दिया गया। हर राजनीतिक पार्टी की चुनाव जीतने की एक रणनीति होती है, हो सकता है कि भाजपा को भी यह लगता हो कि यह मुद्दा उसके वोटरों तक सीधे पहुंचा देता है, मगर एक बात जो सबसे गंभीर और सबसे शर्मनाक है वो यह है कि ऐसे मुद्दे देश के सामाजिक ताने-बाने को खत्म करते हैं।

Sanjay sharma

राज्य छोटा सा था मगर संदेश बहुत बड़ा। दिल्ली का चुनाव कई मायनों में देश के लिए एक बड़ी तस्वीर पेश करने वाला साबित हुआ। इस देश में हर बार चुनाव बुनियादी मुद्दों से इतर धर्म और जाति के घिनौने खेल में फंस जाता है, दिल्ली में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई। संविधान की शपथ खा कर केंद्र में मंत्री बने अनुराग ठाकुर सरीखे नेता गोली मारने का नारा जनता से लगवाते नजर आये तो एक नेता हर बार की तरह पाकिस्तान को दिल्ली के चुनाव में ले आये। यह अच्छा रहा कि आम आदमी पार्टी इस जाल में नहीं उलझी वर्ना पूरा चुनाव हिंदू-मुसलमान, भारत-पाकिस्तान में सिमट कर रह जाता। जिस तरह से शाहीनबाग को दिल्ली चुनाव के मद्देनजर देश भर का मुद्दा बना दिया गया वो हैरान करने वाला था।
शाहीनबाग को एक छोटा धरना न बताकर पूरे देश की प्रयोगशाला तक बता दिया गया। हर राजनीतिक पार्टी की चुनाव जीतने की एक रणनीति होती है, हो सकता है कि भाजपा को भी यह लगता हो कि यह मुद्दा उसके वोटरों तक सीधे पहुंचा देता है, मगर एक बात जो सबसे गंभीर और सबसे शर्मनाक है वो यह है कि ऐसे मुद्दे देश के सामाजिक ताने-बाने को खत्म करते हैं। यह देश गंगा-जमुनी तहजीब का देश है। यहां हर धर्म और हर संस्कृति के मानने वाले लोग रहते हैं। इस देश की खूबसूरती यही है कि हिंदू अपने घर में ईद की सेवइयां बनाता है और मुसलमान अपने घर में दीपावली के दीये जलाता है। यही प्यार की वह भाषा है जो हिंदुस्तान को हिंदुस्तान बनाती है और यह संदेश देती है कि दुनिया में अगर सबसे महत्वपूर्ण बोली है तो वह प्यार की बोली है। अगर इस देश को बचाना है और इस देश की लोकतांत्रिक आवाज को और मजबूत करना है तो यह जरूरी है कि लोकतंत्र के इस पावन विचार को और मजबूत किया जाय। पूरी दुनिया को संदेश दिया जाये कि हमारे देश के 125 करोड़ लोग एक परिवार का हिस्सा हैं और इस परिवार की सबसे खूबसूरती और मजबूती यही है कि हम एक थे, एक हैं और एक रहेंगे।
कोई भी नफरत की आंधी इस देश के प्यार को खत्म नहीं कर सकती।
दिल्ली का चुनाव इस प्यार के संदेश को और आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। यकीं है कि देश के बाकी राज्य भी इस संदेश को समझेंगे और यह कोशिश करेंगे कि जो भी चुनाव हो वह विकास के मुद्दे पर हो। आम आदमी की जरूरत के मुद्दे पर हो और ऐसे मुद्दे पर हो जो लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाता हुआ नजर आये। यही लोकतंत्र की जीत है।

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