लोकतंत्र की मजबूती में सबकी सहभागिता जरूरी

देश में आजकल कई मुद्दों पर जिस तरह जनता के बीच उद्वेलन की स्थिति बनी है, उससे स्पष्ट है कि चुनाव में वे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सवाल है कि ऐसी तीखे ध्रुवीकरण के आधार पर तय होने वाले जनमत से कैसी राजनीति खड़ी होगी और उसके जरिए सत्ता में आए दलों के कामकाज की दिशा क्या होगी!

Sanjay Sharma

दिल्ली विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म हो चुकी है। करीब एक महीने पहले जब चुनाव आयोग ने दिल्ली में मतदान की तारीख की घोषणा की थी, तभी से राजनीतिक गलियारों में इस बात की परोक्ष-प्रत्यक्ष चर्चा शुरू हो गई थी कि इस बार के चुनावों में मतदाताओं का रुझान किस ओर रहेगा और किस पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिलेगा। लेकिन दिल्ली की जनता ने वोटिंग में उतना उत्साह नहीं दिखाया जितना उम्मीद की जा रही थी। जबकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए होने वाले हर चुनाव सबकी नजर में अहम होने ही चाहिए।
देश में आजकल कई मुद्दों पर जिस तरह जनता के बीच उद्वेलन की स्थिति बनी है, उससे स्पष्ट है कि चुनाव में वे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सवाल है कि ऐसी तीखे ध्रुवीकरण के आधार पर तय होने वाले जनमत से कैसी राजनीति खड़ी होगी और उसके जरिए सत्ता में आए दलों के कामकाज की दिशा क्या होगी! आम जनता के बीच यह उम्मीद होती है कि वे जिनका समर्थन करते हैं, उनकी नेतृत्व क्षमता से लेकर भाषा तक में एक गरिमा मौजूद रहे, ताकि उन्हें अपने समर्थन के लिए शर्मिंदा नहीं होना पड़े। लेकिन अफसोस की बात यह है कि कई नेताओं के बयानों की वजह से दिल्ली का राजनीतिक माहौल अपने निचले स्तर की ओर जाता दिखा। महज चुनाव जीतने के लिए नेताओं ने एक दूसरे पर जैसे आरोप लगाए और उसके बूते अपने प्रतिपक्षी के खिलाफ जनमत निर्माण की कोशिश की, उसने न केवल मुद्दों की राजनीतिक जमीन को कमजोर किया, बल्कि जनता के बीच भी ऊहापोह की स्थिति पैदा की।
अमूमन चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग दलों के बीच दिखाई देने वाली कड़वाहटें और तीखे टकराव आमतौर पर चुनावी नतीजों की घोषणा के बाद कम हो जाते हैं और कई बार सहज माहौल बन जाता है। लेकिन कई बार कुछ बेलगाम बयानों का असर जनता के बीच काफी समय तक बना रहता है। चुनाव में उभरे मुद्दों और बयान से लोगों के बीच सोच-समझ कर वोट देने की सलाहियत पैदा होती है। किसी भी देश और समाज के विकास की दिशा जनता के जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों से तय होती है, न कि उत्तेजना और उन्माद फैलाने वाले नकारात्मक और अमूर्तन बयानबाजियों से। एक स्वस्थ लोकतंत्र की ताकत राजनीतिक रूप से जागरूक, प्रशिक्षित नागरिक और विचारों से परिपक्व मतदाता होते हैं। राजधानी होने के महत्व के लिहाज से दिल्ली के चुनाव परिणामों का संदेश देश के बाकी राज्यों में भी सकारात्मक रूप से पड़ेगा। फिलहाल तो अब सबको मतगणना का इंतजार है।

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