कोरोना वायरस और भारत की अर्थव्यवस्था

सवाल यह है कि कोरोना वायरस के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या इससे भारत के कुछ विशेष कारोबारी क्षेत्र ही प्रभावित होंगे? क्या विश्व के तमाम देशों से हो रहे भारतीय व्यापार पर इसका असर नहीं पड़ेगा? क्या निर्यात में होने वाली कमी का असर स्थानीय बाजार और लोगों की आय पर नहीं पड़ेगा?

Sanjay Sharma

चीन से फैल रहे कोरोना वायरस से भारत समेत पूरी दुनिया में दहशत है। तमाम देशों में कोरोना वायरस के पहुंचने की पुष्टिï हो चुकी है। चीन में इस वायरस से अब तक 563 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 28 हजार से अधिक लोग संक्रमित हैं। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एयरपोर्ट से लेकर नेपाल सीमा से सटे इलाकों तक की निगरानी की जा रही है। वायरस के कारण चीन व हांगकांग से होने वाला व्यापार प्रभावित हो रहा है। सवाल यह है कि कोरोना वायरस के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या इससे भारत के कुछ विशेष कारोबारी क्षेत्र ही प्रभावित होंगे? क्या विश्व के तमाम देशों से हो रहे भारतीय व्यापार पर इसका असर नहीं पड़ेगा? क्या निर्यात में होने वाली कमी का असर स्थानीय बाजार और लोगों की आय पर नहीं पड़ेगा? क्या कोरोना वायरस से प्रभावित हो रही चीन की आर्थिक स्थिति के कारण भविष्य में भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर असर नहीं पड़ेगा?
कोरोना वायरस के चलते चीन ही नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पडऩा शुरू हो गया है। वायरस की वजह से सूरत के हीरा उद्योग को अगले 2 महीने में आठ हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान है। हांगकांग सूरत के हीरा कारोबार का बड़ा केंद्र है। यहां कोरोना वायरस की वजह से इमरजेंसी घोषित है। इसका सीधा असर भारतीय व्यापार पर पड़ रहा है। सूरत से हर साल पचास हजार करोड़ के पॉलिश हीरों का निर्यात किया जाता है। यह यहां से कुल निर्यात का 37 प्रतिशत है। वायरस की वजह से गुजराती कारोबारी हांगकांग से वापस लौट रहे हैं। इससे हीरा का कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं चीन को भेजी जाने वाली कपास की गांठों का निर्यात प्रभावित हो रहा है। कपास के निर्यात को एक पखवाड़े के लिए रोक दिया गया है। निर्यात रूकने का असर कपास के मूल्य पर पड़ेगा। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके अलावा कोरोना वायरस का असर चीन को निर्यात किए जाने वाली अन्य वस्तुओं पर भी पड़ेगा। इसके अलावा नेपाल से होने वाले कारोबार पर भी असर पड़ेगा। नेपाल और भारत की सीमाएं खुली है। सीमा के करीब बसने वाले भारतीयों के लिए नेपाल एक बड़ा व्यापार केंद्र है। यहां रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इसके अलावा दोनों देशों के लोग आपस में रोजाना खुदरा व्यापार भी करते हैं। जाहिर है यदि नेपाल में कोरोना का खतरा और बढ़ा तो स्थितियां खराब हो जाएंगी। यदि कोरोना वायरस का खतरा जल्द समाप्त नहीं हुआ तो अन्य देशों से होने वाला आयात-निर्यात प्रभावित होगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। आर्थिक मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए यह खतरे की घंटी है। सरकार को इससे निपटने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी ताकि अर्थव्यवस्था और लोगों की आय पर कम से कम असर पड़े।

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