कैंसर का बढ़ता खतरा, चिकित्सा सेवाएं और जागरूकता

सवाल यह है कि देश में कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है? क्या तंबाकू के बढ़ते सेवन ने हालात को और बिगाड़ दिया है? क्या कैंसर को लेकर देश भर में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का कोई असर नहीं पड़ रहा है? क्या लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण कैंसर के मरीजों की मौत हो रही है?

Sanjay Shamra

कैंसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट बेहद गंभीर है। इसके मुताबिक देश में कैंसर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हर साल 11 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। हर दस भारतीयों में एक के कैंसर की चपेट में आने और 15 में से एक की इस रोग से मौत की आशंका है। सवाल यह है कि देश में कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है? क्या तंबाकू के बढ़ते सेवन ने हालात को और बिगाड़ दिया है? क्या कैंसर को लेकर देश भर में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का कोई असर नहीं पड़ रहा है? क्या लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण कैंसर के मरीजों की मौत हो रही है? क्या यह रोग देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर नहीं डाल रहा है? क्या सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है?
देश भर में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसकी मुख्य वजह तंबाकू के सेवन को माना जाता है। इसके अलावा अनियमित दिनचर्या और जागरूकता के अभाव के कारण भी स्थितियां दिनोंदिन बिगड़ती जा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2018 में भारत में कैंसर रोग से मरने वालों में 42 फीसदी पुरुष और 18 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण इसकी चपेट में आए थे। वहीं नब्बे के दशक की तुलना में इस सदी में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में तेजी इजाफा हुआ है। इस समय हर एक लाख भारतीय में 70 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। भारत में जागरूकता के अभाव और लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण रोग से होने वाली मौतों का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थितियां ज्याद बदतर हैं। यहां महिलाएं ब्रेस्ट में उभरी गांठ आदि को लेकर संकोच के कारण चिकित्सक के पास नहीं जाती हैं। वे तब चिकित्सक के पास पहुंचती हंै, जब हालात बेकाबू हो जाते हैं। वहीं शहरों के नामचीन अस्पतालों में भी कैंसर रोगियों के इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं है। कैंसर संस्थानों में पुरानी विधि से आज भी इलाज किया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक यंत्रों और तकनीकी से इलाज नहीं शुरू हो सका है। रेडियो और कीमोथेरेपी के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके कारण रोग बढ़ जाता है। जागरूकता अभियान के नाम पर स्वास्थ्य विभाग खानपूर्ति करता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्यकर्मी शायद ही कभी जागरूकता अभियान चलाते हैं। सरकार यदि कैंसर की रोकथाम करना चाहती है तो उसे न केवल शहरों के कैंसर संस्थानों में बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करनी होगी। इसके अलावा समाज में तंबाकू सेवन से होने वाले इस रोग के खिलाफ व्यापक मुहिम भी चलानी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सरकार के कोष पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा और रोग भी बेकाबू हो जाएगा।

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