महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने में पुलिस नाकाम क्यों है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को ध्वस्त कर दिया है? सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अपराधियों को तेजाब कैसे मिल रहा है? कड़े कानूनों के बावजूद हालात में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? क्या धीमी न्याय प्रणाली और लचर पुलिस तंत्र के कारण स्थितियां बिगड़ गई हैं?

Sanjay Sharma
हापुड़ में एक दुष्कर्म पीडि़ता पर तेजाब फेंका गया जबकि शामली में कक्षा आठ की छात्रा और प्रयागराज में एक युवती के साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया गया। एक ही दिन में हुई ये तीन वारदातें यह बताने के लिए काफी हैं कि प्रदेश में महिलाएं कितनी असुरक्षित हो चुकी हैं। सवाल यह है कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने में पुलिस नाकाम क्यों है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को ध्वस्त कर दिया है? सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अपराधियों को तेजाब कैसे मिल रहा है? कड़े कानूनों के बावजूद हालात में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? क्या धीमी न्याय प्रणाली और लचर पुलिस तंत्र के कारण स्थितियां बिगड़ गई हैं? क्या महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या अपराधियों के भीतर खाकी का खौफ खत्म हो गया है?
अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद प्रदेश में हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। महिलाओं के प्रति अपराध तेजी से बढ़े हैं। आए दिन हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, पारिवारिक हिंसा जैसी घटनाएं घट रही हैं। बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस का लचर रवैया और विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार जिम्मेदार है। हालात यह हैं कि थानों में पीडि़ताओं की एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती है। थानेदार अपने यहां कम अपराध दिखाने के लिए पीडि़ताओं को थाने से बैरंग लौटा देते हैं। कई बार आला अधिकारियों के निर्देश के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है। यही नहीं अपराधियों से मिलीभगत कर पुलिसकर्मी केस को बेहद कमजोर कर देते हैं। लिहाजा वे कानूनी दांव-पेंचों का सहारा लेकर कड़ी सजा से बच जाते हैं। रही सही कसर अदालतों में धीमी गति से चलने वाली सुनवाई निकाल देती है। वर्षों बाद पीडि़ता को न्याय मिल पाता है। हैरानी की बात यह है कि ऐसी पीडि़ताओं की सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं किया जाता है। इसके चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। हापुड़ की घटना इसी का नतीजा है। महिलाओं पर तेजाब से हमले की घटनाएं भी इधर बढ़ी हैं। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की खुली बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है। ऐसे में हमलावरों को आसानी से तेजाब उपलब्ध हो जाना प्रशासन के रवैए पर सवालिया निशान लगाता है। यदि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकना है तो सरकार को न केवल पुलिस तंत्र में आमूल सुधार करना होगा बल्कि इसमें व्याप्त भ्रष्टïाचार को भी जड़ से समाप्त करना होगा। इसके अलावा पीडि़ताओं को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही अपराधियों को सलाखों के पीछे लाने की भी व्यवस्था करनी होगी। अन्यथा अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।

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