बदलता जम्मू-कश्मीर आतंकवादी और सेना

सवाल यह है कि तमाम चौकसी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या घाटी में अभी भी आतंकियों के स्लीपर सेल मौजूद हैं? क्या स्थानीय स्लीपर सेल सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को पनाह दे रहे हैं?

Sanjay Sharma

धारा 370 खत्म होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है। पाबंदियों के हटने के बाद यहां जनजीवन सामान्य होने लगा है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान अभी भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहा है। जम्मू-कश्मीर में बड़ी वारदात को अंजाम देने पहुंचे जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को भारतीय सेना ने ढेर कर दिया है। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। सवाल यह है कि तमाम चौकसी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या घाटी में अभी भी आतंकियों के स्लीपर सेल मौजूद हैं? क्या स्थानीय स्लीपर सेल सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को पनाह दे रहे हैं? क्या कश्मीर मसले पर वैश्विक स्तर पर मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के हुक्मरान आतंकियों के जरिए घाटी में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं? आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के पीछे पाकिस्तान की मंशा क्या है? क्या यह स्थितियां दोनों देशों के बीच एक और युद्ध का कारण नहीं बनेगी?
अपने जन्म के साथ ही पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। पाकिस्तान की नजर कश्मीर पर लगी हुई थी। वह भारत से कई युद्ध लड़ चुका है। सभी युद्धों में उसे मुंह की खानी पड़ी। धारा 370 हटने के बाद जैसे ही जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा हटा पाकिस्तानी सेना, गुप्तचर एजेंसी और सेना सभी में खलबली मच गई। उसने इस मामले को विश्व मंच पर उठाने की कोशिश की। चीन को छोडक़र किसी भी देश ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। यही नहीं तमाम इस्लामिक राज्य भी पाकिस्तान के साथ नहीं खड़े हुए। अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताते हुए इससे पल्ला झाड़ लिया। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान नयी चाल चल रहा है। वह आतंकियों के जरिए खून-खराबा फैलाकर दुनिया का ध्यान जम्मू-कश्मीर की ओर खींचना चाहता है। उसकी मंशा है कि आतंकी घटनाओं के जरिए वह यह साबित करेगा कि कश्मीर में सब कुछ ठीक नहीं है। यही नहीं पाकिस्तान कश्मीर में वैश्विक देशों के हस्तक्षेप न करने पर भारत से परमाणु युद्ध की धमकी दे चुका है। वहीं कश्मीर में सेना ने न केवल अधिकांश आतंकियों का सफाया कर दिया है बल्कि घुसपैठ पर लगाम लगाने में भी सफलता हासिल की है। इसके अलावा अलगाववादियों पर शिकंजा कस कर आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सहायता को भी खत्म कर दिया है। इससे भी पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इन सबके बावजूद सरकार को सीमा पार से हो रही घुसपैठ और पाकिस्तान दोनों से चौकन्ना रहना होगा।

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