डीजीपी की जाति से तय होगा यूपी के चीफ सेक्रेटरी का भविष्य

  • यह भी है तय कि डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी दोनों में से एक होगा ब्राह्मïण
  • कोई नहीं करेगा स्वीकार पर हकीकत है कि यूपी में जाति देखकर होते हैं तय डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी
  • पांच महीने से चीफ सेक्रेटरी का स्थायी न हो पाना भी है कारण इसी जाति के खेल का 

 

संजय शर्मा
लखनऊ। इसे देश के सबसे बड़े राज्य का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां नौकरशाही की सबसे बड़ी कुर्सी जाति के आधार पर ही तय होती है। इस बार भी ऐसा ही होने जा रहा है। यह तय माना जा रहा है कि चीफ सेक्रेटरी की कुर्सी डीजीपी की जाति देखकर ही तय होगी। यदि हितेश अवस्थी यूपी के डीजीपी बनते हैं तो आरके तिवारी और अवनीश अवस्थी की इस कुर्सी पर बैठने की इच्छा अधूरी रह जाएगी और यदि डीजीपी की कुर्सी पर किसी गैर ब्राह्मïण की तैनाती हुई तो यह तय है कि यूपी का स्थायी चीफ सेक्रेटरी आरके तिवारी या अवनीश अवस्थी में से ही कोई एक होगा। हालांकि अपवादस्वरूप कुछ ऐसे भी हुए है जिनकी तैनाती जाति के आधार नहीं हुई पर अधिकांश की जाति के आधार पर हुई।
यूपी में लगभग तेरह प्रतिशत ब्राह्मïण मतदाता हैं जो इस समय बहुत खुश नजर नहीं आ रहे हैं लिहाजा तय माना जा रहा है कि डीजीपी या चीफ सेक्रेटरी में से एक ब्राह्मïण होगा। एक इंटरव्यू में ब्राह्मïणों की नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल में खुद सीएम योगी कह चुके हैं कि पांच प्रमुख पदों में से चार पर ब्राह्मïण और एक पर ठाकुर हैं। जाहिर है नौकरशाही की तैनाती इस बार भी जातीय गुणा-भाग के आधार पर होने जा रही है।
यूपी के डीजीपी के नाम पर अगले तीन दिन में मुहर लग जानी है। वरिष्ठïता के क्रम में सबसे ऊपर हितेश अवस्थी का नाम है। उनकी छवि बेहद ईमानदार और कड़े फैसले लेने वाले अधिकारी की है। सीबीआई का सालों का अनुभव होने के कारण उन्हें बेहतर पुलिसिंग के लिए उपयुक्त भी माना जा रहा है। पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर वे डीजीपी बनते हैं तो चीफ सेक्रेटरी पद पर आरके तिवारी और अवनीश अवस्थी की दावेदारी समाप्त हो जाएगी।
अवनीश अवस्थी सीएम योगी के सबसे करीबी अफसर हैं। सूचना, गृह और यूपीडा जैसे विभाग उनके पास हैं। उनकी सेवाकाल के अभी दो वर्ष बाकी हैं। नौकरशाही में इस बात की आम चर्चा थी कि यूपी के चीफ सेक्रेटरी आरके तिवारी को स्थायी इसलिए नहीं किया जा रहा क्योंकि फरवरी में नए डीजीपी को देखकर उनकी तैनाती कर दी जाएगी। दरअसल, डीजीपी की नियुक्ति को संघ लोक सेवा आयोग हरी झंडी देता है। वहां पर यूपी सरकार का ज्यादा दखल नहीं माना जाता है। दूसरा नौकरशाही और राजनैतिक गलियारों में यह आम चर्चा है कि चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के नामों को लेकर यूपी दरबार और दिल्ली दरबार के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। ऐसे में डीजीपी के नाम को हरी झंडी मिलने के बाद ही यूपी के चीफ सेक्रेटरी का नाम तय होगा और यह तय है कि वह जाति के आधार पर ही होगा।

ऐसा कभी हो नहीं सकता। तजुर्बा और योग्यता के बेस पर श्रेठ पदों पर चयन किया जाता है। जाति आधारित मानक नहीं होना चाहिए।
विक्रम सिंह,पूर्व डीजीपी

आईएएस और आईपीएस अफसर किसी जाति या धर्म के आधार पर चयनित नहीं होते। अगर इस तरह कभी भी इनका चयन किया गया तो यह एक खतरनाक संकेत होगा।
अमिताभ ठाकुर ,आईजी, यूपी

विवादित बयान पर निर्वाचन आयोग सख्त अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के चुनाव प्रचार करने पर रोक

  • भाजपा को दिया प्रचारकों की लिस्ट से दोनों को बाहर करने का आदेश

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली चुनाव में भडक़ाऊ बयान देनेवाले भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश सिंह वर्मा पर चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने दोनों को तत्काल प्रभाव से प्रचारकों की लिस्ट से निकालने का निर्देश पार्टी को दिया है। कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद प्रवेश वर्मा के बयानों की काफी आलोचना हो रही थी। अब वे दिल्ली चुनाव में प्रचार नहीं कर सकेंगे।
कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर ने चुनाव प्रचार के दौरान देश के गद्दारों को.. बयान दिया था। इस बयान की काफी आलोचना भी की गई। दूसरी तरफ वेस्ट दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग प्रदर्शन की तुलना कश्मीर से करते हुए कहा था, वे (प्रदर्शनकारी) आपके घरों में घुस जाएंगे और आपकी बहन-बेटियों से रेप करेंगे। यही नहीं बयान का विरोध होने के बाद सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा था कि वह अपने बयान पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगे।

तेजतर्रार आईपीएस दीपक कुमार सहित पांच आईपीएस का चयन केंद्र में डीआईजी के लिये

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सरकार की ओर से यूपी कैडर के पांच आईपीएस अधिकारियों का चयन केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए किया गया है। जिन अधिकारियों के नामों का चयन किया गया है, वे सभी 2005 बैच के आईपीएस और डीआईजी स्तर के अधिकारी हैं। इनमें दीपक कुमार, अंकज शर्मा, आरके भारद्वाज, प्रेम कुमार और उपेंद्र अग्रवाल का नाम शामिल है।

सीएए-एनआरसी के खिलाफ भारत बंद, यूपी में भी असर

  • गोंडा के कई इलाकों में बंद रहीं दुकानें और प्रतिष्ठïान
  • मुंबई में लोकल ट्रेनें रोकी गईं दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में आज भारत बंद का आह्वान किया गया। बहुजन क्रांति मोर्चा के इस भारत बंद को एनआरसी-सीएए का विरोध करने वाले अन्य संगठनों का भी सहयोग मिला। मुंबई में प्रदर्शनकारियों ने लोकल ट्रेनों को रोक दिया है जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोगों ने प्रदर्शन किया। यूपी के गोंडा में भी बंद का आंशिक असर देखने को मिला। मुस्लिम व्यापारी संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बंद का आंशिक असर देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में दुकानें और संस्थान बंद रहे। बिहार के कई जिलों बंद को लेकर वामदलों के कार्यकर्ता सडक़ों पर उतर आए। इन्होंने सडक़ जाम कर नारेबाजी की। बहुजन क्रांति मोर्चा के सदस्यों ने महाराष्टï्र में कांजुरमार्ग स्टेशन में रेलवे ट्रैक को बाधित कर दिया हैं।

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