पीएफआई फंडिंग पर अखिलेश ने सरकार को घेरा, पूछा, इतना पैसा पहुंचा कैसे

क्या कर रही थीं सरकारी एजेंसियां, कहां से आया पैसा, करें सार्वजनिक

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी सीएए को लेकर उठाए सवाल देश में अशांति पर जताई चिंता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में पीएफआई को हुई फंडिंग को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा, इतना पैसा देश में पहुंचा कैसे। आखिर सरकारी एजेंसियां क्या कर रही थीं।
ईडी की जांच में दिसंबर में हुई हिंसा मामले में पीएफआई को 120 करोड़ की एनजीओ द्वारा फंडिंग की बात सामने आने पर उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि यह पैसा कहां से आया और किन-किन तारीखों को आया। जब इतनी बड़ी धनराशि खातों में आ रही थी तो सरकारी एजेंसियां क्या कर रही थीं। इस मौके पर गांधी शांति यात्रा के साथ लखनऊ पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार के सीएए और एनआरसी की घोषणा से देश में अशांति का माहौल पैदा हुआ है। केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें दमन की नीति पर चल रही हैं। स्टेट स्पॉसर्ड हिंसा के तहत महिलाओं से कंबल छीने जा रहे हैं । यह सरकारी आतंकवाद है। ये कानून मौलिक ढांचे के प्रतिकूल हैं। इसे तकनीकी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है। सरकार भी इसे लागू नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ जो बयान दिया वह एकदम बचकाना है। शरजील इमाम के देश विरोधी बयान पर उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों के हम खिलाफ हैं। देश में हिंसा नहीं होनी चाहिए, जो लोग आंदोलन कर रहे हैं उन्हें शांतिपूर्वक आंदोलन करना चाहिए । देश और दुनिया के आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि एयर इंडिया को खरीदने को कोई तैयार नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश के कई इलाकों में दंगा और तोडफ़ोड़ करने के आरोप में पीएफआई के 25 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था और सरकार ने इसको बैन करने की संस्तुति केंद्रीय गृहमंत्रालय से की थी।

जेवर: किसानों-पुलिसकर्मियों में हिंसक भिड़ंत, एसडीएम समेत कई घायल

  • अधिग्रहित जमीन पर कब्जा लेने पहुंची थी पुलिस, पथराव, तोडफ़ोड़
  • बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर किसान कई दिनों से दे रहे थे धरना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के रोही गांव में अधिग्रहित जमीन पर कब्जा लेने पहुंची पुलिस पर किसानों ने पथराव किया। किसान यहां काफी दिनों से धरने पर बैठे थे। पथराव में एसडीएम गुंजा सिंह समेत कई पुलिसककर्मी घायल हो गए हैं। कई वाहनों में भी तोडफ़ोड़ की गई। घटना की सूचना के बाद मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माण के लिए रोही गांव की जमीन भी अधिग्रहित हुई है। किसान यहां बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर काफी समय से धरने पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन तानाशाही कर रहा है और उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। जिला प्रशासन ने आज जेवर एयरपोर्ट की जमीन पर कब्जा लेने की घोषणा की थी। इसके लिए रोही गांव में जिलाधिकारी को बैठक करने जाना था। डीएम के पहुंचने से पहले जेवर की एसडीएम गुंजा सिंह, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी रोही गांव पहुंचे और जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया। इसके बाद किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया और माहौल बिगड़ गया। किसानों की ओर से जिला प्रशासन पर पथराव किया गया है, जिसमें कई वाहन टूट गए हैं। एसडीएम गुंजा सिंह भी घायल हो गई हैं।

 

एनपीआर की प्रक्रिया पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

  • केंद्र सरकार से मांगा जवाब
  • सीएए के साथ होगी सुनवाई, जनहित याचिका पर कोर्ट ने जारी की नोटिस
  • फरवरी में शीर्ष अदालत करेगा दोनों मामलों पर सुनवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) प्रक्रिया पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनपीआर पर रोक लगाने के लिए आज जनहित दायर की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया कि आधार में डेटा की सिक्योरिटी की गारंटी है, लेकिन नागरिकता नियमावली, 2003 के तहत इकट्ठा की जा रही जानकारी के दुरुपयोग से किसी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसकी सुनवाई नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के साथ होगी। पिछले साल दिसंबर में नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने एनपीआर को मंजूरी दी थी। इसमें घर-घर जाकर एक रजिस्टर तैयार किया जाएगा और कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। पिछले दिनों कोर्ट में सीएए को भी चुनौती दी गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई फरवरी में होगी।

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