पुरानी तकनीक से पानी को साफ कर रहा जलकल विभाग, प्यूरीफायर के भरोसे लोग

घरों में हो रही दूषित पानी की आपूर्ति, केमिकल और भारी धातुओं का नहीं हो रहा शोधन
गोमती के पानी के शोधन में बरती जा रही लापरवाही

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के पानी की गुणवत्ता हमेशा ही सवालों के घेरे में रहती है। यहां गोमती के पानी को पीने लायक बनाने के लिए पुरानी तकनीक का इस्तेमाल आज भी किया जा रहा है। लिहाजा स्वच्छ पेयजल के लिए राजधानीवासी वाटर प्यूरीफायर का प्रयोग कर रहे हैं।
गोमती देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि राजधानी के लगभग 36 नाले इसमे बिना एसटीपी के गिर रहे हैं। ऐसे में शहरवासी गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जलकल विभाग द्वारा हर रोज ऐशबाग से 225 एमएलडी, बालागंज से 100 व गोमती नगर के तीसरे जलकल से 80 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जाती है। गोमती से लिए गए कच्चे पानी को पुरानी तकनीकी से शोधित कर इसकी आपूर्ति घरों में की जाती है। मुश्किल यह है कि गोमती से जलापूर्ति के लिए सी ग्रेड की गुणवत्ता का पानी चाहिए होता है, लेकिन बरसात के मौसम को छोड़ दें तो पूरे साल नदी जल की गुणवत्ता सही नहीं रहती है। ऐसे में पारंपरिक शोधन तकनीक से नदी जल को पीने योग्य बनाना असंभव है। गोमती जल में रसायनों के साथ-साथ भारी धातुओं की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में केवल पारंपरिक विधि से किए गए शोधन से पानी कतई पीने योग्य नहीं बनता। जलकल अभियंता बताते हैं कि गोमती के पानी का शोधन करने के लिए कोऑगुलेशन, फ्लोक्यूलेशन, सेगमेंटेशन, फिल्ट्रेशन व क्लोरीनेशन किया जाता है। इससे पानी में तैरने वाली अशुद्धियां अलग हो जाती हैं और क्लोरीनेशन व ब्लीचिंग से पानी विसंक्रमित हो जाता है, लेकिन इस प्रोसेस में जल में मौजूद केमिकल व भारी धातुओं का उपचार नहीं होता। उत्तर प्रदेश में केवल आगरा में जल शोधन के लिए अत्याधुनिक इजरायली तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से पीने के पानी की हर तरह की अशुद्धियां समाप्त हो जाती हैं। आगरा में यमुना जल बेहद दूषित था इसलिए अलीगढ़ से गंगा से पानी लाकर यहां उपचार के बाद आपूर्ति की जाती है। यह तकनीक महंगी है, लेकिन लोगों की सेहत के मद्देनजर जरूरत इस बात की है कि हर जगह उपचार की अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाए, तभी स्वच्छ जल मिल सकेगा। लखनऊ के पानी को भारतीय जल मानक ब्यूरो ने भी पीने लायक नहीं बताया है।

बढ़ा टीडीएस सेहत के लिए खतरनाक

राजधानी में जहां एक ओर पानी की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहा है वही यहां तमाम तरह के वाटर प्यूरीफायर की मांग बढ़ती जा रही है। इसका बिजनेस पूरे लखनऊ में फल-फूल रहा है। ज्यादातर कंपनी पानी में बढ़े हुए टीडीएस को शरीर के लिए खतरनाक बता रही हंै।

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