अब राम मंदिर मॉडल पर विवाद विहिप-द्वारका शारदा पीठ के अपने-अपने दावे

  • सम्मेलन में विहिप के मॉडल पर संतों-महंतों ने लगा दी है अपनी मुहर
  • प्रस्तावित मॉडल के जरिए ही विहिप ने चलाया था मंदिर आंदोलन
  • अविमुक्तेश्वरानंद अंकोरवाट की तर्ज पर चाहते हैं मंदिर का निर्माण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जहां करोड़ों राम भक्त और साधु-संत भव्य मंदिर का निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं राम मंदिर मॉडल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विहिप और द्वारका शारदा पीठ ने अपने-अपने मॉडल पर मंदिर निर्माण की वकालत की है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद कहां खत्म होता है और मंदिर निर्माण के लिए गठित ट्रस्ट किस मॉडल पर निर्माण कराने पर राजी होता है।
विवाद की शुरूआत प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में हुई। यहां विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के शिविर में जहां प्रस्तावित मॉडल लोगों के दर्शनों के लिए रखा गया है, वहीं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अपना नया मॉडल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रख दिया है। उनका कहना है कि तीस साल पहले तैयार किया गया विहिप का डिजाइन काफी छोटा है इसलिए मौजूदा समय को देखते हुए कंबोडिया के अंकोरवाट की तर्ज पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। हालांकि संत सम्मेलन में हजारों संतों ने विहिप के प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल पर ही मंदिर निर्माण किए जाने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा चुके हैं। संतों ने साफ कर दिया है कि इससे अलग हटकर कोई दूसरा मॉडल कतई मंजूर नहीं होगा। विहिप के केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी के मुताबिक, प्रस्तावित मॉडल के जरिए ही विहिप ने राममंदिर को लेकर पूरे देश में जनजागरण अभियान चलाया था, इसलिए इसी मॉडल के आधार पर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए जबकि मंदिर निर्माण के लिए सत्तर फीसदी पत्थरों को तराशने का भी काम पूरा हो चुका है। राम जन्मभूमि का आन्दोलन विहिप ने अपने हाथों में लेने के बाद आठ अक्टूबर 1984 को अयोध्या से राम मंदिर आन्दोलन की शुरुआत की थी। इस मॉडल को गुजरात के जाने माने आर्किटेक्ट चन्द्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है।

ऐसा है विहिप के प्रस्तावित मंदिर का मॉडल

विहिप के केन्द्रीय मंत्री के मुताबिक, आर्किटेक्ट चन्द्रकांत सोमपुरा सोमनाथ मंदिर, दिल्ली अक्षरधाम और लंदन में स्थित अक्षर पुरुषोत्तम धाम को भी डिजाइन कर चुके हैं। विहिप के प्रस्तावित मंदिर की लम्बाई 268 फीट पांच इंच, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट है। मंदिर का अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडपम, रंगमंडपम, गर्भगृह डिजाइन किया गया है। इसमें 212 स्तम्भ होंगे, जिसमें से पहली मंजिल पर 106 स्तम्भ होंगे, जिसकी ऊंचाई 16 फीट 6 इंच, दूसरी मंजिल पर भी 106 स्तम्भ होंगे, जिसकी ऊंचाई 14 फीट 6 इंच रखी गई है। प्रत्येक स्तम्भ में 16 मूर्तियां होंगी। पहला चबूतरा आठ फीट ऊंचा 10 फीट चौड़ा होगा और दूसरा चबूतरा चार फीट 9 इंच का होगा, उसके ऊपर स्तम्भ लगेंगे। पहली मंजिल 18 फीट और दूसरी मंजिल 15 फीट 9 इंच, उसके ऊपर 16 फीट 3 इंच की पेटी होगी। पेटी के ऊपर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर होगा।

शारदा पीठ की दलील

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विहिप के मॉडल को सिरे से ही खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंदा जमा कर लेने से और पत्थर तराश लेने भर से मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता है। उन्होंने विहिप के मॉडल को लेकर कहा है कि यह मॉडल तीस साल पहले बना है जबकि राम लला के पास कम भूमि थी, लेकिन आज रामलला के पास पर्याप्त भूमि है इसलिए यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि विहिप के मंदिर की ऊंचाई काफी कम है जबकि हमारे मॉडल की ऊंचाई 1008 फीट है। उनके मुताबिक, यह मॉडल वाराणसी के आर्किटेक्ट आदित्य गुप्ता ने तैयार किया है, जिसमें मंदिर की नींव 70 फीट, मंदिर का एरिया साढ़े तीन एकड़ और गर्भगृह 216 वर्ग फीट का रखा गया है।

साधु-संतों ने जताई नाराजगी

राम मंदिर मॉडल को लेकर विवाद खड़ा किए जाने से साधु संत नाराज हैं। शिवयोगी मौनी महाराज का कहना है कि लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है इसलिए अब सभी धर्माचार्यों को इस मामले को मॉडल के विवाद में नहीं डालना चाहिए। दंडी सन्यासी स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज का कहना है कि राम मंदिर आन्दोलन में विहिप की बड़ी अहम भूमिका रही है इसलिए विहिप के ही मॉडल पर अब मंदिर का निर्माण शुरु हो जाना चाहिए। कुछ साधु-संतों का ये भी मानना है कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद चाहें तो विहिप के मंदिर को सोने से जडि़त कर सकते हैं।

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