बढ़ती बेरोजगारी खतरे की घंटी

सवाल यह है कि बेरोजगारी में लगातार बढ़ोत्तरी क्यों हो रही है? क्या सुस्त आर्थिक विकास दर के कारण ये स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या ढांचा गत उद्योग धंधों और तकनीकी में समुचित सुधार नहीं होने के कारण बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है? क्या भारत में बेरोजगारी को लेकर सरकार गंभीर नहीं है? क्या आय के साधनों को बढ़ाए बिना इस समस्या से निपटा जा सकता है?

sanjay Sharma

बढ़ती बेरोजगारी को लेकर अंतरराष्टï्रीय श्रम संगठन की ताजा रिपोर्ट बेहद गंभीर है। इसके मुताबिक भारत समेत पूरे विश्व में इस वर्ष बेरोजगारों की संख्या में 25 लाख की बढ़ोत्तरी होगी। सवाल यह है कि बेरोजगारी में लगातार बढ़ोत्तरी क्यों हो रही है? क्या सुस्त आर्थिक विकास दर के कारण ये स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या ढांचा गत उद्योग धंधों और तकनीकी में समुचित सुधार नहीं होने के कारण बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है? क्या भारत में बेरोजगारी को लेकर सरकार गंभीर नहीं है? क्या आय के साधनों को बढ़ाए बिना इस समस्या से निपटा जा सकता है? क्या लोगों को बेहतर जीवन के साधन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? क्या केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे बेरोजगारी की समस्या को दूर किया जा सकता है?
भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बेरोजगारी की समस्या जटिल हो गई है। अंतरराष्टï्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 47 करोड़ लोग बेरोजगारी के शिकार हैं। इस मामले में भारत की हालत भी काफी खराब है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के मुताबिक 2011-12 में जहां 9 राज्यों में राष्ट्रीय औसत दर से ज्यादा बेरोजगारी थी, वहीं 2017-18 में यह 11 राज्यों तक पहुंच गई। यूपी में 2011-12 में बेरोजगारी दर 1.5 फीसदी थी जो 2017-18 में 6.4 प्रतिशत हो गई और यह लगातार बढ़ती जा रही है। देश में पुरूषों की बेरोजगारी दर 6.2 जबकि महिलाओं की 5.7 प्रतिशत रही। शहरों में पुरूषों और महिलाओं की बेरोजगारी दर ग्रामीण इलाके से अधिक है। वहीं 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच 90 लाख लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। शहरी इलाकों में लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। ऑटो सहित कई सेक्टर में हालत बिगडऩे से हालात और भी खराब हुए हैं। टेक्सटाइल, चाय, रियल इस्टेट जैसे तमाम सेक्टर सुस्ती की चपेट में हैं। सरकार के तमाम सुधारात्मक कदमों के बावजूद स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। सरकारी पदों पर नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। आर्थिक सुस्ती से परेशान कंपनियां छंटनी कर रही हैं। जाहिर है केवल सरकारी नौकरी के भरोसे सभी लोगों को रोजगार नहीं दिया जा सकता है। यदि सरकार बेरोजगारी पर नियंत्रण लगाना चाहती है तो उसे निजी क्षेत्रों को बढ़ावा देने के साथ स्वरोजगार के लिए देश में बेहतर माहौल भी बनाना होगा। वहीं रोजगार के लिए लोन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन सेक्टरों पर अधिक फोकस करना होगा जहां अधिक नौकरियां उपलब्ध होने की संभावना हो। इसके अलावा मूलभूत ढांचा और तकनीकी के क्षेत्र में भी बेहतर सुधार करना होगा।

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