हितेश अवस्थी या डीएस चौहान में से एक होगा यूपी का डीजीपी

  • हितेश और डीएस चौहान दोनों माने जाते हैं ईमानदार और तेजतर्रार अफसर
  • डीजीपी बनने के लिए अफसरों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगाई दौड़

 संजय शर्मा
लखनऊ। अगर कोई बड़ी राजनीतिक गोटी नहीं फंसी तो यूपी का अगला डीजीपी हितेश अवस्थी या डीएस चौहान में से कोई एक होगा। हितेश अवस्थी बेहद ईमानदार और किसी का दवाव न मामने वाले अफसर हैं तो दूसरी ओर डीएस चौहान की भी छवि बहुत अच्छी है। लखनऊ और दिल्ली दरबार चाहता है कि अगला डीजीपी कानून व्यवस्था के मोर्चे पर बहुत बेहतर काम करने वाला हो क्योंकि यूपी की कानून-व्यवस्था पर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं। ये दोनों अफसर ऐसे हैं जो इस मोर्चे पर सरकार की आकांक्षाओं पर खरे उतर सकते हैं। बस देखना यह है कि लखनऊ और दिल्ली के राजनीतिक आकाओं को यूपी में इतने कडक़ अफसरों की जरूरत है या नहीं।
अभी तक यह तय माना जा रहा था कि 1985 बैच के हितेश अवस्थी ही यूपी के अगले डीजीपी होंगे। 14 साल तक सीबीआई में उन्होंने कई सनसनीखेज मामलों को अंजाम तक पहुंचाया है। वे यूपी के उन चंद आईपीएस अफसरों में से एक हैं जिनकी ईमानदारी पर कोई भी सवाल नहीं उठा सका है। मगर उनके डीजीपी बनने में सबसे बड़ी बाधा उनका ब्राह्मïण होना है। यूपी के चीफ सेक्रेटरी भी ब्राह्मïण हैं और दोनों बड़े पदों पर ब्राह्मïणों को तैनात करने से सरकार बचेगी। हालांकि अगर आलोक टंडन या संजय अग्रवाल, मुकुल सिंघल या किसी गैर ब्राह्मïण को चीफ सेके्रटरी बनाया जाता है तो ऐसी स्थिति में हितेश अवस्थी को डीजीपी बनाकर डीएस चौहान को डीजी इंटेलिजेंस बनाया जा सकता है। डीजी इंटेलिजेंस भी सीएम के बेहद करीबी होते हैं।
इन्हीं चर्चाओं के बीच अचानक यूपी सरकार ने डीएस चौहान को वापस बुलाने के लिए केंद्र को खत लिखा। चौहान इस समय सीआरपीएफ में तैनात हैं। केंद्र सरकार ने उनको यूपी जाने के लिए अनुमति भी दे दी है। अचानक इस खत और केंद्र सरकार की अनुमति के बाद इस बात की चर्चा और तेज हो गई कि डीएस चौहान यूपी के अगले डीजीपी होंगे। उनकी आईएएस पत्नी राधा चौहान भी इस समय लखनऊ में तैनात हैं। डीएस चौहान भी पूर्व में उत्तर प्रदेश में अपनी नौकरी के दौरान शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। वे कडक़ और ईमानदार अफसर माने जाते हैं।
यूपी में अभी तक डीजीपी क्षत्रिय तो चीफ सेक्रेटरी ब्राह्मïण बनाए गए हैं। ऐसी स्थिति में अगर डीएस चौहान को डीजीपी बनाया गया तो इसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। डीएस चौहान एक ऐसा नाम है जिस पर लखनऊ दरबार और दिल्ली दरबार दोनों का भरोसा है। उन्होंने यूपी में एडीजी जेल रहकर कई माफियाओं के पसीने छुड़ा दिए थे। ऐसे में 1988 बैच के डीएस चौहान को डीजीपी बनाया जा सकता है। हालांकि उनसे सीनियर कई अफसर यूपी में मौजूद हैं मगर पहले भी सीनियर की उपेक्षा करके डीजीपी बनाए गए हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि साल के पहले महीने के आखिरी दिन किसके नाम की लॉटरी लगती है।

सीएए पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इंकार, केंद्र से मांगा जवाब

  • केंद्र सरकार के जवाब के बाद होगी अगली सुनवाई

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से जुड़ी 144 याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार को चार हफ्ते का वक्त दिया है। सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस कानून पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाएगा।
चीफ जस्टिस बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि असम और त्रिपुरा पर अलग से सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक सीएए को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। सिब्बल ने संविधान पीठ के गठन की मांग भी की थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि अभी वे कोई अंतरिम आदेश नहीं देंगे। असम त्रिपुरा से जुड़े मामले को अलग से सुना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सीएए से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ बनाने के भी संकेत दिए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह याचिकाओं की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन करेगा। वह केंद्र की पूरी बात सुने बिना कोई एकतरफा आदेश नहीं दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाओं का केंद्र के पास पहुंंचना जरूरी है। गौरतलब है कि सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताडऩा के शिकार अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

वोट के लिए भारत की आत्मा को खत्म कर रही भाजपा: अखिलेश

  • रोजगार और किसानों के मुद्दे पर बहस करने को हूं तैयार
  • जनेश्वर मिश्र के बताए रास्ते पर चलते हैं समाजवादी
  • जातीय जनगणना से क्यों डर रही है भाजपा सरकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा वोट के लिए भारत की आत्मा को खत्म कर रही है। वह धर्म के नाम पर नागरिकों से भेदभाव कब तक करेगी । सीएए का विरोध सिर्फ सपा ही नहीं बल्कि महिलाएं और युवा भी कर रहे हैं। भाजपा चाहे तो मुझसे विकास पर बहस कर ले। मैं रोजगार और किसानों के मुद्दे पर कहीं भी बहस को तैयार हूं।
उन्होंने कहा कि समाज में समानता के लिए छोटे लोहिया (जनेश्वर मिश्र)ने संघर्ष किया। समाज में खाई को पाटने का काम किया। जिस रास्ते को छोटे लोहिया ने दिखाया है उसी रास्ते पर हम चल रहे हैं। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है वह राजनीति करने वालों की भाषा नहीं है । यहां ठोक देंगे और जुबान खींच लेंगे जैसी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। अमित शाह ने कहा था कि सीएए वापस नहीं होगा, ये राजनीति करने वालों की भाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा जातीय जनगणना से क्यों डर रही है। अगर जातीय जनगणना हो जाये तो हिन्दू-मुस्लिम का झगड़ा खत्म हो जाएगा । इसके पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर जनेश्वर मिश्र पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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