जाम व अतिक्रमण से सिसकता शहर और तंत्र

सवाल यह है कि सडक़ों पर लगने वाले जाम से लोगों को मुक्ति दिलाने में सरकार नाकाम क्यों हो रही है? बाजारों और सडक़ों पर से अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा है? क्या पुलिस प्रशासन की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण ये स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या लचर टै्रफिक सिस्टम ने हालात को और भी बदतर कर दिया है? क्या ऐसे ही लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाया जा सकेगा?

sanjay Sharma

तमाम दावों के बावजूद प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाम और अतिक्रमण से आज तक मुक्त नहीं हो सकी है। वहीं टै्रफिक सिस्टम की लापरवाही के कारण स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं। लिहाजा लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि सडक़ों पर लगने वाले जाम से लोगों को मुक्ति दिलाने में सरकार नाकाम क्यों हो रही है? बाजारों और सडक़ों पर से अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा है? क्या पुलिस प्रशासन की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण ये स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या लचर टै्रफिक सिस्टम ने हालात को और भी बदतर कर दिया है? क्या ऐसे ही लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाया जा सकेगा? जिम्मेदार विभाग आखिर हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं?
लखनऊ समेत प्रदेश के तमाम शहरों में जाम और अतिक्रमण की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। हालत यह है कि जाम के चलते लोगों को मिनटों की दूरी घंटों में तय करनी पड़ती है। जाम तो लखनऊ की पहचान बन चुका है। कोई सडक़ और चौराहा नहीं है जहां जाम न लगता हो। इसकी सबसे बड़ी वजह अतिक्रमण है। अमीनाबाद से लेकर पत्रकारपुरम चौराहे तक अतिक्रमण फैला हुआ है। यहां पटरी दुकानदारों और वाहन संचालक सडक़ पर डेरा डाले रहते हैं। लिहाजा सडक़ें गलियों में तब्दील हो जाती हैं। पीक ऑवर में तो इन सडक़ों से निकलना खासा मुश्किल होता है। रही-सही कसर लचर टै्रफिक सिस्टम निकाल देती है। कई चौराहों पर पुलिस नदारद रहती है। कई इलाकों में सिग्नल सिस्टम खराब पड़े हैं लेकिन इनको ठीक करने की जहमत आज तक नहीं उठाई गई है। हैरानी की बात यह है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि निगम के दस्ते के लौटते ही वे फिर अपनी दुकानें वहीं पर सजा लेते हैं। इसमें दो राय नहीं कि पुलिस की शह के बिना ये अतिक्रमणकारी इतनी हिम्मत नहीं दिखा सकते हैं लेकिन पुलिस वसूली करने में व्यस्त रहती है। जाम लगने से न केवल ईंधन और समय की बर्बादी हो रही है बल्कि वाहनों के इंजन से निकलने वाला धुआं वातावरण में जाकर वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा रहा है। इसका सीधा असर यहां रहने वाले लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। यदि सरकार राजधानी को जाम और अतिक्रमण से निजात दिलाना चाहती है तो उसे न केवल इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए बल्कि अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध भी कड़े कानूनी कदम उठाने चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना कभी साकार नहीं हो पाएगा।

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