हादसों की रेल और लापरवाह तंत्र

सवाल यह है कि रेल हादसों का सिलसिला थम क्यों नहीं रहा है? रेलवे यात्रियों की सुरक्षित यात्रा को सुनिश्चित करने में नाकाम क्यों है? क्या ट्रेनों के संचालन को हाईटेक किए बिना हादसों को रोका जा सकता है? क्या जर्जर पटरियों पर दौड़ती ट्रेनें यात्रियों की जान को जोखिम में नहीं डाल रही हैं? क्या रेलवे तंत्र यात्रियों से टिकट के पैसे वसूलने तक अपनी जिम्मेदारी मानता है?

Sanjay sharma

ओडिशा के कटक में एक मालगाड़ी ने लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस को टक्कर मार दी जिससे ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में 40 यात्री घायल हो गए हैं। दुर्घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। सवाल यह है कि रेल हादसों का सिलसिला थम क्यों नहीं रहा है? रेलवे यात्रियों की सुरक्षित यात्रा को सुनिश्चित करने में नाकाम क्यों है? क्या ट्रेनों के संचालन को हाईटेक किए बिना हादसों को रोका जा सकता है? क्या जर्जर पटरियों पर दौड़ती ट्रेनें यात्रियों की जान को जोखिम में नहीं डाल रही हैं? क्या रेलवे तंत्र यात्रियों से टिकट के पैसे वसूलने तक अपनी जिम्मेदारी मानता है? रेलवे में सुधार की वकालत करने वाली तमाम रिपोट्र्स को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया है? क्या इसी व्यवस्था में बुलेट और हाईस्पीड ट्रेनों को संचालित करने का सपना देखा जा रहा है? क्या मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर दौड़ाने की व्यवस्था को बदलने की जरूरत महसूस नहीं हो रही है?
भारतीय रेलवे दुनिया की चौथा रेल नेटवर्क है। प्रतिदिन कई लाख लोग ट्रेनों के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते हैं। इसके अलावा लाखों टन माल की ढुलाई इनके माध्यम से की जाती है। रेलवे भारत की जीडीपी में अहम योगदान करती है लेकिन लगातार हो रहे हादसे चिंता उत्पन्न करते हैं। हकीकत यह है कि आज भी रेलवे का पूरी तरह कायाकल्प नहीं किया जा सका है। आज भी पुराने सिग्नल सिस्टम से ट्रेनों का संचालन हो रहा है। जर्जर पटरियों को बदला नहीं जा सका है। इन जर्जर पटरियों पर ट्रेनें दौड़ रही हैं। इसके कारण हादसों की आशंका हमेशा बनी रहती है। कई रेलवे फाटक अभी भी मानव विहीन है। इन पर रेलवे तंत्र कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मालगाडिय़ों और यात्री ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर चलने के कारण स्थितियां बदतर होती जा रही है। इससे पटरियां जल्द खराब हो जाती हैं। कई रेलवे पुल जर्जर अवस्था में संचालित है। यह स्थिति तब है जब रेलवे में सुधार के लिए कई कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। इन रिपोट्र्स को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यदि हादसों का यही हाल रहा तो लोग ट्रेन यात्रा करने से बचेंगे और इसका असर भारत के राजकोष पर पड़ेगा। लिहाजा रेलवे तंत्र को जल्द से जल्द ट्रेनों के संचालन की हाईटेक व्यवस्था करनी होगी। साथ ही हादसों से बचने की तकनीक विकसित करनी होगी। इस मामले में भारत, चीन और रूस जैसे देशों से सीख सकता है। इन देशों में ट्रेन हादसों की वर्षों में कभी कोई इक्का-दुक्का घटनाएं ही दर्ज की जाती हैं। यदि ऐसा नहीं किया गया तो देश में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना शायद ही कभी साकार हो पाएगा।

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