स्वतंत्रदेव सिंह निर्विरोध बने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीेएम ने पार्टी दफ्तर पहुंचकर दी बधाई

  • पार्टी महासचिव भूपेन्द्र यादव ने की घोषणा, संगठन मंत्री सुनील बंसल ने किया नये अध्यक्ष का स्वागत
  • पार्टी कार्यालय नारों से गूंजा, नये अध्यक्ष का हुआ जोरदार स्वागत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वतंत्रदेव सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हो गए हैं। पार्टी महासचिव भूपेन्द्र यादव ने इसकी घोषणा की। सीएम योगी आदित्यनाथ और संगठन मंत्री सुनील बंसल ने स्वतंत्रदेव सिंह को पार्टी दफ्तर पहुंचकर बधाई दी। इस दौरान पार्टी कार्यालय नारों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने नए अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में स्वतंत्रदेव सिंह का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। संगठनात्मक चुनावी प्रक्रिया के तहत उनका एकमात्र नामांकन पत्र भरा गया था। आज जैसे ही इसकी घोषणा पार्टी महासचिव ने की, भाजपा कार्यालय में स्वतंत्रदेव सिंह के स्वागत में जोरदार नारे लगाए गए। कार्यकर्ताओं ने उनके ऊपर फूल बरसाए। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन मंत्री सुनील बंसल उनको बधाई देने पार्टी दफ्तर पहुंचे। इस दौरान सीएम योगी ने भाजपा परिषद के सदस्यों को संबोधित भी किया। गौरतलब है कि कल लखनऊ के भाजपा मुख्यालय में नामांकन जमा करने की प्रक्रिया दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक प्रदेश चुनाव अधिकारी आशुतोष टंडन गोपालजी की निगरानी में चली थी। इस मौके पर केंद्रीय सह पर्यवेक्षक के रूप में मंगल पांडेय भी मौजूद थे। केवल स्वतंत्रदेव ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था। प्रदेश अध्यक्ष पद के नामांकन के समय उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल, प्रदेश सह चुनाव अधिकारी त्रयबंक त्रिपाठी व वाईपी सिंह के अलावा उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर, विजय बहादुर पाठक, गोविंद नारायण शुक्ला व विद्यासागर सोनकर मौजूद थे।

स्वतंत्रदेव को संगठन की गहरी समझ: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्रदेव सिंह को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बधाई। उनको संगठन की गहरी समझ है। उन्होंने सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल बिठाया, लिहाजा उपचुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली।

एनपीआर पर आर-पार, ममता ने किया बैठक का बहिष्कार

  • बंगाल को छोडक़र सभी राज्यों के सचिव हुए शामिल
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुलाई है एनपीआर पर बैठक

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन एक्ट के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनपीआर पर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक का बहिष्कार कर दिया है। बैठक में बंगाल को छोडक़र सभी राज्यों के सचिव, जनगणना अधिकार शामिल हो रहे हैं।
एनपीआर की बैठक को लेकर भी राजनीति जारी है। पश्चिम बंगाल की ओर से लिखित में इस बैठक का बहिष्कार करने की बात कही गई है। एनपीआर और नागरिकता संशोधन कानून के मसले पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार विरोध जता रही हैं। गौरतलब है कि एनपीआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी राज्यों से मिलकर रणनीति तैयार करना चाहता है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला इस बैठक की अगुवाई कर रहे हैं। इसमें राज्य सरकारों की ओर से मुख्य सचिवों और जनगणना निदेशक शामिल होते हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, एनपीआर का मकसद देश के निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस तैयार करना है। इसमें डेमोग्राफिक तथा बायोमेट्रिक ब्योरे शामिल किए जाएंगे। यह रजिस्टर स्थानीय, उपजिला, जिला, राज्य और राष्टï्रीय स्तर पर नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीयन तथा राष्ट्रीय पहचान-पत्र जारी करना) नियम, 2003 के तहत बनाया जाएगा। नियम के प्रावधानों के उल्लंघन पर 1000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

राष्ट्रपति ने खारिज की मुकेश की दया याचिका

  • गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति के पास भेजी थी निर्भया के दोषी की दया याचिका

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। निर्भया मामले में चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह की दया याचिका केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति के पास भेजी थी। साथ ही राष्टï्रपति से याचिका को खारिज करने की भी सिफारिश की थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया केस के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है।
मुकेश ने 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई थी। दिल्ली की पटियालाा हाउस कोर्ट ने मुकेश समेत चार दोषियों को फांसी देने के लिए 22 जनवरी का डेथ वॉरंट जारी किया था। हालांकि, मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित होने के कारण गुरुवार को कोर्ट ने कहा था कि 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती है। पटियाला हाउस कोर्ट ने ही 7 जनवरी को चारों दोषियों, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी करते हुए फांसी देने की तारीख 22 जनवरी तय की थी। हालांकि, दोषियों के पास राष्ट्रपति से दया याचिका दायर करने का आखिरी विकल्प बचा था। मुकेश ने क्षमा दान याचिका दी थी।

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