माया के जन्मदिन पर बसपा पेश कर सकती है सियासी रोडमैप तैयारियां तेज

  • जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया जाएगा बसपा प्रमुख का जन्मदिन
  • पदाधिकारियों को अभी से मिशन 2022 में जुटने के दिए जा चुके हैं निर्देश
  • प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने की बनाई गई है रणनीति

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। बसपा ने मिशन 2022 की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन पर बसपा अपना सियासी रोडमैप पेश कर सकती है। पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क अभियान तेज करने और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने के निर्देश दिए गए हैं।
बसपा प्रमुख मायावती का जन्मदिन आगामी 15 जनवरी को है। मायावती जब सत्ता में रहती थी तो उनका जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाया जाता था लेकिन जब से मायावती सत्ता से बाहर हुई हैं उनका जन्मदिन सादगी से जनकल्याणकारी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन को लेकर उनके कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। इस दिन मायावती मेरे संघर्षमय जीवन का सफरनामा नाम की पुस्तक का भी विमोचन करती हैं। इससे पहले 2019 में भी उन्होंने इस पुस्तक का विमोचन किया था। इस पुस्तक के जरिए मायावती अगले एक सालों तक के लिए अपने सियासी रोड मैप के बारे में अपने कार्यकर्ताओं को बताती है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती को जिस रूप में उनकी पार्टी मिली थी उस रूप में वह पार्टी नहीं रही। बसपा प्रमुख ने अपने पार्टी के विस्तार को लेकर के न सिर्फ गंभीरता से सोचा बल्कि जमीन पर कई सारे नए प्रयोग भी किए। कभी सोशल इंजीनियरिंग, कभी दलित, मुस्लिम और ओबीसी गठबंधन का प्रयोग मायावती ने किया। मौजूदा वक्त में उत्तर प्रदेश को छोडक़र मध्य प्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब ,तेलंगाना, उत्तराखंड में बहुजन समाज पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव में उतारती रही है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार मायावती जन्मदिन के मौके पर किन सियासी मुद्दों को अपने कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचाने की कोशिश करेंगी। यही नहीं बसपा प्रमुख उत्तर प्रदेश में विभिन्न मुद्दों को लेकर योगी सरकार पर हमलावर भी हैं।

सपा से किया था गठबंधन
मायावती ने 2019 के लोकसभा का चुनाव सपा से गठबंधन कर लड़ा था। इस चुनाव में बसपा को 10 सीटों पर विजय मिली थी जबकि सपा को केवल पांच सीटों से संतोष करना पड़ा था। गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन नहीं होने से मायावती ने सपा से खुद को अलग कर लिया। पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में 19 फीसद से ज्यादा वोट मिले थे।

उपचुनाव में मिल चुका है झटका

सपा से गठबंधन तोडक़र बसपा ने उत्तर प्रदेश के 12 विधान सभा सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ा था। इसमें बसपा का खाता नहीं खुल सका था। यही नहीं कई जगहों पर बसपा उम्मीदवार चौथे नंबर पर चले गए थे। इन परिणामों ने बसपा प्रमुख को चिंतित कर दिया है। लिहाजा वे बेहद सधी सियासी चाल चल रही हैं। आगामी विधान सभा चुनाव बसपा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है।

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