राजधानी: ठेंगे पर प्रतिबंध, राहगीरों के लिए खतरनाक साबित हो रहा चाइनीज मांझा

  • हादसों के बावजूद नहीं चेते जिम्मेदार, बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा प्रतिबंधित मांझा
  • मकर संक्रांति पर बढ़ी मांझे की बिक्री, पतंगबाजी में जमकर किया जा रहा प्रयोग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने की परंपरा रही है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से चाइनीज मांझे को बेचा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि बेचने और खरीदने वालों को पता है कि चाइनीज मांझा बेहद खतरनाक है बावजूद इसकी मांग बढ़ती जा रही है। इसकी चपेट में आकर कई लोग घायल हो चुके हैं और कुछ बच्चों की मौत भी हो चुकी है। प्रतिबंध के बावजूद जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
शहर में त्यौहार के मौके पर पतंगबाजी का क्रेज बढ़ जाता है। बच्चे और युवा छतों और मैदानों में पतंग उड़ाते नजर आ रहे हैं। पतंगबाजी के लिए जहां इनके हाथों में पहले देशी मांझा होता था, अब ये चीन के खतरनाक मांझे का प्रयोग कर रहे हैं। यह मांझा एक बार किसी के गले में अटका तो वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है। यह मांझा इतना मजबूत होता है कि इससे गर्दन कट जाती लेकिन मांझा टूटता नहीं है। इस मांझे को बच्चे पतंग उड़ाने के लिए यूज करके अपनी जान से खेल रहे हैं। शहर में खुलेआम दुकानों पर बिक रहे इस चाइनीज मांझे की रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यह मांझा इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसे प्लास्टिक की डोर पर कांच का कोट करके तैयार किया जाता है, जिससे दूसरे की पतंग को हवा में काटा जा सके। बाजार में बिक रहा यह चाइनीज मांझा दूसरे मांझों की तरह नहीं है। ऐसे में यदि यह किसी के पैर, हाथ या गर्दन में उलझ जाए तो घायल कर देता है। इस मांझे से कई केस हो चुके हैं। कई बच्चे अपनी जान से हाथ तक धो बैठे हैं। गौरतलब है कि राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझा कुछ साल पहले लाया गया था। शुरुआत में यह बहुत कम बिक रहा था। इसके बाद लगातार इसकी बिक्री बढ़ती गई और अधिकतर दुकानों पर यही मांझा बिक रहा है। जिसको दस रुपए से लेकर पंद्रह रुपए का सौ गज तक बेचा जा रहा है। एक रील की कीमत पिछले साल डेढ़ सौ से दो सौ रुपए थी। वहीं, अब दो सौ रुपए तक पहुंच गई है।

हो चुके हैं हादसे

  •  6 दिसम्बर 2018: गोमतीनगर निवासी विनय शुक्ला जियामऊ से 1090 चौराहे की ओर जा रहे थे। अचानक उनके चेहरे के सामने मांझा आ गया। जब तक वह समझ पाते तब तक उनकी नाक और उसकी हड्डी बुरी तरह कट गई थी।
  •  23 अक्टूबर 2018: सिविल अस्पताल के पास छात्रा शिवानी की गर्दन पतंग के मांझे से बुरी तरह कट गई। डॉक्टरों ने बड़ी मुश्किल से उसकी जान बचाई।
  •  11 मार्च 2018: गोमतीनगर इलाके में स्कूटी सवार युवती विजय लक्ष्मी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई। डॉक्टरों ने 11 टांके लगाकर उसकी जान बचाई।
  •  14 सितंबर 2017: हुसैनगंज निवासी विभांशु बाइक से अलीगंज से आईटी चौराहा की ओर आ रहा था। तभी विभांशु की गर्दन में चाइनीज मांझा फंस गया। गर्दन में करीब सात सेमी. लंबा और गहरा कट लगने से खून का फव्वारा फूट पड़ा। आनन-फानन में राहगीरों ने उसे अस्पताल पहुंचाया।
  • क्यों खतरनाक है चाइनीज मांझा
  1.  चाइनीज मांझा प्लास्टिक डोर की तरह होता है।
  2.  यह टूटता नहीं है बल्कि खिंचता जाता है।
  3.  इसके ऊपर कांच का कोट किया जाता है।
  4.  प्लास्टिक पर कांच का कोट इसे खतरनाक बना देता है।
  5.  साधारण मांझा टूट जाता है जिससे बचाव हो जाता है।
  6.  यह मांझा टूटता नहीं है, इसके तीखे होने से लोग घायल हो जाते हैं।
  7. पक्षी भी हो रहे घायल

चाइनीज मांझा एक ओर लोगों के शरीर को काट रहा है तो आसमान में उडऩे वाले पक्षियों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। यह उनके पंखों में उलझकर उनकी जान ले रहा है। इसके साथ ही प्लास्टिक के बिजली के तारों को भी काट रहा है, जिससे बिजली गुल हो जाती है। कुछ साल पहले शहर में एक बच्चे की गर्दन में मांझा उलझ गया था, जिससे उस बच्चे की मौत हो गई थी।

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