बेखौफ बदमाश और लचर पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि क्या अपराधियों के मन से खाकी का खौफ खत्म हो चुका है? सरकार की अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद स्थितियां बद से बदतर क्यों होती जा रही हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने बदमाशों के हौसलों को बुलंद कर दिया है? क्या एनकाउंटर और गिरफ्तारियों का कोई असर बदमाशों पर नहीं पड़ रहा है?

Sanjay Sharma

प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। पिछले चौबीस घंटे में बदमाशों ने 13 लोगों की हत्याएं कर दीं। इसमें प्रयागराज में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या भी शामिल है। हत्या की ये वारदातें यह बताने के लिए काफी हैं कि प्रदेश की कानून व्यवस्था किधर जा रही है। सवाल यह है कि क्या अपराधियों के मन से खाकी का खौफ खत्म हो चुका है? सरकार की अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद स्थितियां बद से बदतर क्यों होती जा रही हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने बदमाशों के हौसलों को बुलंद कर दिया है? क्या एनकाउंटर और गिरफ्तारियों का कोई असर बदमाशों पर नहीं पड़ रहा है? आखिर खुफिया तंत्र क्या कर रहा है? क्या पुलिस तंत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है? क्या मित्र पुलिसिंग के बिना सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है?
प्रदेश में आए दिन हत्या, लूट, बलात्कार और डकैती जैसे संगीन अपराध हो रहे हैं। महिलाओं के प्रति अपराधों में इजाफा हो रहा है। तमाम दावों के बाद भी पुलिस अपराधों पर नियंत्रण लगाने में नाकाम साबित हो रही है। अपराधी वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और पुलिस लकीर पीटती नजर आती है। अपराधों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति कहीं भी धरातल पर उतरती नहीं दिख रही है। इसमें दो राय नहीं कि अपराधों में इजाफा होने का मुख्य कारण पुलिसिया कार्यप्रणाली है। थानों से लेकर चौकी तक में पीडि़तों की सुनवाई नहीं हो रही है। कई बार कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है। पुलिसकर्मी ही पीडि़तों पर आरोपियों से समझौता करने का दबाव बनाते हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं जिसमें पुलिस व बदमाशों के गठजोड़ का खुलासा हुआ है। स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम हो चुका है। यही वजह है कि तमाम अपराधी वारदातों को अंजाम देकर खुलेआम घूम रहे हैं। ये अपराधी समाज के लिए घातक साबित हो रहे हैं। भ्रष्टïाचार के घुन ने पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली को पटरी से उतार दिया है। मित्र पुलिसिंग की हकीकत यह है कि आम आदमी पुलिस से दूर ही रहने में भलाई समझता है। ऐसी स्थिति में अपराधों को रोकना मुश्किल है। यदि सरकार अपराधों पर लगाम लगाना चाहती है तो उसे न केवल विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त करना होगा बल्कि स्थानीय खुफिया तंत्र को भी मजबूत करना होगा। इसके अलावा अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की व्यवस्था करनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुधारना मुश्किल होगा। यह स्थिति समाज और सरकार दोनों के लिए ठीक नहीं है।

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