अमेरिका-ईरान के बीच टकराव और भारत

सवाल यह है कि अमेरिका ने यह हमला क्यों किया? क्या वह ईरान से दो-दो हाथ करने की तैयारी कर चुका है? क्या ईरान अमेरिका से सीधे टकराने की स्थिति में है? क्या ईरान और अमेरिका के टकराव का असर भारत व चीन पर नहीं पड़ेगा? क्या विश्व के तमाम देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए यह टकराव घातक सिद्ध होगा?

Sanjay sharma
अमेरिकी हमले में ईरान की कुद्स सेना के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद पश्चिमी एशिया में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान ने बदला लेने की चेतावनी जारी कर दी है। हालांकि भारत और चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। बावजूद इसके यदि युद्ध हुआ तो इसका असर मध्य एशिया समेत पूरे विश्व पर पड़ेगा। सवाल यह है कि अमेरिका ने यह हमला क्यों किया? क्या वह ईरान से दो-दो हाथ करने की तैयारी कर चुका है? क्या ईरान अमेरिका से सीधे टकराने की स्थिति में है? क्या ईरान और अमेरिका के टकराव का असर भारत व चीन पर नहीं पड़ेगा? क्या विश्व के तमाम देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए यह टकराव घातक सिद्ध होगा?
2015 में न्यूक्लियर डील से बाहर होने के बाद से ही ईरान-अमेरिका के बीच तनाव है। अमेरिका ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा। पिछले एक वर्ष में सऊदी व मध्य-पूर्व में तमाम तेल टैंकों पर हमले हुए जिसके लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराता रहा है लेकिन जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद जंग के हालात पैदा हो गए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग का तर्क है कि सुलेमानी इराक व मध्य-पूर्व में अमेरिकी राजदूतों पर हमले की साजिश रच रहा था इसलिए उसे मार गिराने का फैसला किया गया। इससे पहले इराक में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट से हमला हुआ था। ट्रंप ने इन हमलों के लिए ईरान को दोषी ठहराया था और कहा था कि वे इसकी बड़ी कीमत चुकाएंगे। दरअसल, मध्य-पूर्व क्षेत्र में तमाम अवरोधों के बावजूद ईरान का प्रभाव बढ़ाने में सुलेमानी ने अहम भूमिका अदा की थी। लिहाजा वह अमेरिका व इजरायल-सऊदी की नजरों में चढ़ गए थे। यदि युद्ध होता है तो इसमें केवल अमेरिका व ईरान ही शामिल नहीं होंगे बल्कि अमेरिका के सहयोगी इजरायल-सऊदी और ईरान के सहयोगी देश भी हिस्सा लेंगे। इससे खाड़ी देशों में रह रहे अमेरिकियों और भारतीयों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ेगी। ईरान समर्थित समूह हमले कर सकते हैं। बावजूद इसके ईरान अमेरिका के खिलाफ शायद ही सीधी लड़ाई में उतरे। ज्यादा संभावना है कि ईरान अमेरिका की मित्र सेनाओं पर हमले करे। इसकी वजह यह है कि इराक में सब कुछ सामान्य नहीं है। सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। उसकी अर्थव्यवस्था काफी खराब है। यदि तनाव लंबे समय तक चला तो इसका असर भारत ही नहीं चीन पर भी पड़ेगा। तेल आपूर्ति प्रभावित होगी और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ेंगी। चीन और भारत दोनों के लिए ही यह स्थिति सही नहीं होगी। हालांकि अमेरिका पर तेल आपूर्ति का कोई असर नहीं पड़ेगा।

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