सीडीएस, सेना और सरकार

सवाल यह है कि सेना में सीडीएस की जरूरत क्यों पड़ी और इसकी उपयोगिता क्या है? क्या तीव्र गति से होने वाले युद्धों के जमाने में तीनों सेनाओं के बीच जबरदस्त तालमेल जरूरी नहीं है? क्या सीडीएस से देश की सैन्य मारक क्षमता में अभूतपूर्व विकास होगा? क्या यह सेना के आधुनिकीकरण में अपनी अहम भूमिका निभाएगा?

Sanjay Sharma

पूर्व आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की कमान संभाल ली। इसके साथ ही देश के सैन्य इतिहास में एक नया पद अस्तित्व में आ गया। यह न केवल तीनों सेनाओं पर नियंत्रण रखेगा बल्कि सरकार और सेना के बीच सेतु का भी काम करेगा। सवाल यह है कि सेना में सीडीएस की जरूरत क्यों पड़ी और इसकी उपयोगिता क्या है? क्या तीव्र गति से होने वाले युद्धों के जमाने में तीनों सेनाओं के बीच जबरदस्त तालमेल जरूरी नहीं है? क्या सीडीएस से देश की सैन्य मारक क्षमता में अभूतपूर्व विकास होगा? क्या यह सेना के आधुनिकीकरण में अपनी अहम भूमिका निभाएगा? क्या इससे युद्ध के दौरान सरकार को सहुलियत मिलेगी? क्या इससे तीनों सेनााएं टीम भावना के साथ काम कर सकेगी?
भारत अपने दो शत्रुओं चीन और पाकिस्तान से घिरा है। चीन-पाक की जुगलबंदी भारत के लिए हमेशा से परेशानी का सबब रही है। अब तुर्की भी इस खेमे में शामिल होने की फिराक में है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से तनाव चरम पर है। सीमा पर युद्ध जैसे हालात हैं। चीन भी भारतीय क्षेत्र में गाहे-बगाहे घुसपैठ की कोशिश करता रहता है। ऐसे में युद्ध के दौरान जल-थल और वायु सेनाओं के बीच तालमेल की जरूर है। इसके मद्देनजर सीडीएस का सृजन किया गया है। सीडीएस की जरूरत कारगिल युद्ध के समय महसूस की गई थी। उस समय वायु और थल सेना में तालमेल के अभाव के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। कारगिल युद्ध के बाद गठित के सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली कमेटी की 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में सर्वप्रथम सीडीएस की नियुक्ति का सुझाव दिया गया था। वहीं नरेश चंद्र टास्क फोर्स ने 2012 में परमानेंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी की नियुक्ति का सुझाव दिया। डीबी शेकटकर समिति ने भी 2016 में सीडीएस की सिफारिश की थी। इसमें दो राय नहीं कि इससे तीनों सेनाओं के बीच तालमेल स्थापित करने में सफलता मिलेगी। खुद एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी इसे स्वीकार करते हैं। साथ ही सेना की जरूरतों और उसके आधुनिकीकरण के काम में भी तेजी आएगी। तीनों सेनाएं बतौर टीम काम कर सकेगी। इससे तीव्र गति से युद्धों को अंजाम तक पहुंचाया जा सकेगा। हालांकि चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के अधिकारों के संबंध में अभी बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है बावजूद इसके सीडीएस भावी युद्ध की समन्वित सैन्य गतिविधियों की रूपरेखा का निर्धारण कर इनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे सैन्य ताकत में मजबूती आएगी।.

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.