शुभकामना,संकल्प और उम्मीदों का नया साल

नया साल हर वस्तु को नए दृष्टि से देखने का संदेश देता है। इस दृष्टि में नयापन ही मनुष्य के जीवन में उल्लास और उम्मीदें जगाता है। नए सपनों को देखने और पूर्ण करने का जज्बा पैदा करता है। सपनों को पूरा करने के लिए यह हमारी इच्छाशक्ति को मजबूत बना देता है। यह खुद का सम्मान करने और दूसरे के व्यक्तित्व को स्वीकारने की दृष्टिï भी देता है। ये इतिहास से सबक सीखकर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। इस बार नए साल से ढेरों उम्मीदें हैं।

Sanjay sharma

नए साल का आगाज हो चुका है। शुभकामना संदेशों की भरमार लग गई है। हर व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज है। पटाखों की रौशनी और रंग बिरंगे गुब्बारों के साथ नववर्ष का स्वागत हो रहा है। हर व्यक्ति कुछ अच्छा करने, बुरी आदतें छोडऩे का संकल्प ले रहा है। इनमें कुछ लोग अपने समाज और देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो कुछ लोग अपने पसंदीदा क्षेत्र में नया मुकाम हासिल करना चाहते हैं। इन सबकी तरह झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले, फुटपाथ और रैन बसेरों में सोकर अपनी रातें गुजारने वाले गरीबों की भी तमाम इच्छाएं, उम्मीदें और आशाएं हैं, जो दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े इन गरीबों की दुनिया में उजाला नहीं होगा। इनकी उम्मीदों को पंख नहीं लगेंगे, इनके चेहरे पर मुस्कान नहीं दिखेगा, हमें खुद को विकसित होते समाज का हिस्सा कहे जाने में संकोच महसूस होता रहेगा। इसलिए सरकार को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े उन व्यक्तियों के जीवन में भी उम्मीदों की उस किरण को जलाये रखना होगा, उनको विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे खुद को समाज की मुख्य धारा से जोड़ सकें। वे भी नये साल पर अपने नये संकल्पों, नई उम्मीदों और नई संभावनाओं के साथ देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।
फिलहाल तो खट्टी-मीठी यादों के साथ एक और साल गुजर गया। नया साल उम्मीदों की पोटली उठाए आ टपका है। यह एक जरूरी संदेश भी लाया है। संदेश गूढ़ है। नया साल हर वस्तु को नए दृष्टि से देखने का संदेश देता है। इस दृष्टि में नयापन ही मनुष्य के जीवन में उल्लास और उम्मीदें जगाता है। नए सपनों को देखने और पूर्ण करने का जज्बा पैदा करता है। सपनों को पूरा करने के लिए यह हमारी इच्छाशक्ति को मजबूत बना देता है। यह खुद का सम्मान करने और दूसरे के व्यक्तित्व को स्वीकारने की दृष्टिï भी देता है। ये इतिहास से सबक सीखकर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। इस बार नए साल से ढेरों उम्मीदें हैं। मसलन, देश विकास की राह पर तेज गति से आगे बढ़ेगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। दुनिया में फैली हिंसा की आग कम हो जाएगी। जाति और धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होगी। बेटियों की भ्रूण हत्या नहीं होगी। महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हो जाएंगे। दलितों का उत्पीडऩ रुकेगा और किसानों को उनके हिस्से की खुशी मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प फलीभूत होगा। सांप्रदायिक हिंसा का नामोनिशान मिट जाएगा और नेता अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए अपशब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे। आइए, नए साल में हम नयी और सकारात्मक सोच से देश और दुनिया को सुंदर और समृद्ध बनाने का संकल्प लें।

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