ट्रेनों में बढ़ते अपराध और रेल प्रशासन

सवाल यह है कि रेल प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा करने में नाकाम क्यों हो रहा है? रेलवे सुरक्षा बल के जवान आखिर क्या कर रहे हैं? चलती ट्रेनों में हो रहे अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराना रेल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? क्या रेल प्रशासन लोगों से किराया वसूलने को ही अपना कर्तव्य समझ रहा है?

Sanjay Sharma

काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के महिला कोच में यात्रा कर रही एक युवती से बदमाशों ने न केवल छेडख़ानी की बल्कि विरोध पर उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। गंभीर रूप से घायल युवती को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ट्रेनों में बढ़ती आपराधिक वारदातों की यह एक बानगी भर है। सवाल यह है कि रेल प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा करने में नाकाम क्यों हो रहा है? रेलवे सुरक्षा बल के जवान आखिर क्या कर रहे हैं? चलती ट्रेनों में हो रहे अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराना रेल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? क्या रेल प्रशासन लोगों से किराया वसूलने को ही अपना कर्तव्य समझ रहा है? क्या बढ़ते अपराधों से रेलवे की साख पर असर नहीं पड़ेगा? क्या इसका देश के विकास की रफ्तार पर असर नहीं पड़ेगा?
भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यहां लाखों लोग प्रतिदिन एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते हैं। हर दिन लाखों टन माल की आवाजाही ट्रेनों के जरिए की जाती है। इसके एवज में मोटा राजस्व मिलता है। रेलवे देश की जीडीपी में अपना अहम योगदान देती है। बावजूद इसके यात्रियों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रेलवे केवल यात्रियों से किराया वसूलने में ही दिलचस्पी दिखा रही है। सवारी ट्रेनों में चलने वाले रेलवे पुलिस के जवान कभी-कभी ही दिखाई पड़ते हैं। अधिकतर वे जनरल बोगी में यात्रियों से वसूली करते दिखते हैं। लिहाजा आपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे चलती ट्रेनों में लूटपाट कर रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। चलती ट्रेनों में महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। महिला कोच में भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। लिहाजा बदमाश इन कोचों में घुस जाते हैं और छेड़छाड़ व लूटपाट जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के महिला कोच में हुई ताजा घटना इसकी पुष्टिï करता है। लगातार बढ़ते अपराधों के बावजूद रेलवे प्रशासन इन पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता नहीं दिख रहा है। इसके कारण रेलवे की साख पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। यदि रेलवे पुलिस का अपराधियों के प्रति यही रवैया रहा तो अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल हो जाएगा। इसका असर यात्रियों पर पड़ेगा। वे ट्रेन यात्रा से बचने लगेंगे और यह रेल की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं होगा। यदि रेलवे यात्रियों को सुरक्षित सफर मुहैया कराना चाहती है तो उसे न केवल अपने सुरक्षा तंत्र को सक्रिय करना होगा बल्कि अपराधों पर भी लगाम लगाना होगा। साथ ही रेलवे सुरक्षा तंत्र को जवाबदेह बनाना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह रेलवे के लिए ठीक नहीं होगा।

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