अटल भूजल योजना के निहितार्थ

सवाल यह है कि क्या इस योजना से भविष्य में भूगर्भ जल का संरक्षण करने में सफलता मिलेगी? क्या योजना को अमलीजामा पहनाने में नौकरशाही आड़े नहीं आएगी? क्या लोगों को बिना जागरूक किए योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है? क्या बिना जवाबदेही के योजना को परवान चढ़ाया जा सकेगा?

Sanjay Sharma
भूमिगत जल के संरक्षण और संवद्ध्र्रन के लिए केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना की शुरूआत की है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए छह हजार करोड़ खर्च होंगे। इसमें पचास फीसदी भारत सरकार और पचास फीसदी वल्र्ड बैंक खर्च करेगी। योजना उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्टï्र में लागू होगी। इन राज्यों का चयन भूजल की कमी, प्रदूषण और अन्य मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है। सवाल यह है कि क्या इस योजना से भविष्य में भूगर्भ जल का संरक्षण करने में सफलता मिलेगी? क्या योजना को अमलीजामा पहनाने में नौकरशाही आड़े नहीं आएगी? क्या लोगों को बिना जागरूक किए योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है? क्या बिना जवाबदेही के योजना को परवान चढ़ाया जा सकेगा? क्या यह योजना जल संवद्र्धन के साथ देश की आर्थिक समृद्धि में अपना योगदान देने में सफल होगी?
अंधाधुंध दोहन के कारण पूरे देश में भूमिगत जल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। कई शहर ड्राई जोन के खतरनाक बिंदु तक पहुंच चुके हैं। भूमिगत जल का प्रयोग पेयजल व फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है। लेकिन इसके संरक्षण और संवद्र्धन के लिए कोई प्रयास होता नहीं दिख रहा है। शहरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग नहीं होता है। भूमिगत जल को रिचार्ज करने वाले प्राकृतिक साधन तालाब, कुंए और पोखरे खत्म होते जा रहे हैं। कई तालाबों को पाटकर इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। वृक्षों के जरिए भी भूमिगत जल का संवद्र्धन किया जाता है लेकिन इनकी भी अंधाधुंध कटाई की जा रही है। लिहाजा हालात खराब होते जा रहे हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ में हर साल भूमिगत जल का स्तर गिर रहा है। गर्मियों में यहां के तमाम हैंडपंप सूख जाते हैं। किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। भूमिगत जल कम होने के साथ प्रदूषित भी होता जा रहा है। कई जगह भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा मिल रही है। ऐसी स्थिति में बिना सटीक योजना बनाए इस संकट से निपटा नहीं जा सकता। जाहिर है भूमिगत जल के संरक्षण और संवद्र्धन के लिए शुरू की गई यह योजना शानदार है। यदि राज्य सरकारें और नौकरशाही ईमानदारी पूर्वक इस योजना को लागू करने में सफल रहीं तो इसका परिणाम निकट भविष्य में बेहतर दिखाई पड़ेगा। इसके अलावा लोगों को भी जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा। बिना जन सहभागिता के दीर्घकालीन और जटिल लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल होता है। उम्मीद है, योजना परवान चढ़ेगी और देश पर मंडरा रहा जल संकट दूर हो जाएगा।

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.