अग्निकांडों से सबक कब लेंगी राज्य सरकारें?

सवाल यह है कि अग्निकांडों को लेकर देश की राज्य सरकारें और प्रशासन गंभीर क्यों नहीं हैं? क्या ये घटनाएं पुलिस-प्रशासन की लापरवाही का नतीजा हैं? यूपी समेत तमाम राज्यों में अवैध फैक्ट्रियां किसकी शह पर संचालित हो रही हैं? इन घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? घनी आबादी वाले क्षेत्र में फैक्ट्रियां कैसे संचालित हो रही हैं?

Sanjay sharma

देश की राजधानी दिल्ली के अनाज मंडी की एक इमारत में चल रही अवैध फैक्ट्री में आग लगने से 43 मजदूरों की मौत हो गई जबकि 17 अन्य घायल हो गए। अधिकांश मौतें धुएं के चलते दम घुटने से हुईं। यहां बैग, टोपियां और प्लास्टिक के सामान बनाए जा रहे थे। सवाल यह है कि अग्निकांडों को लेकर देश की राज्य सरकारें और प्रशासन गंभीर क्यों नहीं हैं? क्या ये घटनाएं पुलिस-प्रशासन की लापरवाही का नतीजा हैं? यूपी समेत तमाम राज्यों में अवैध फैक्ट्रियां किसकी शह पर संचालित हो रही हैं? इन घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? घनी आबादी वाले क्षेत्र में फैक्ट्रियां कैसे संचालित हो रही हैं? क्या लोगों की जान से खिलवाड़ करने की छूट किसी को दी जा सकती है? क्या राज्य सरकारें इससे सबक लेंगी?
दिल्ली में घटी घटना सभी राज्य सरकारों के लिए सबक से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई शहर आग के मुहाने पर हैं। अकेले राजधानी में कई बड़े अग्निकांड हो चुके हैं और कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। बावजूद आज तक स्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ है। प्रदेश स्तर पर अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया जा सका है। हैरानी की बात यह है कि तमाम फैक्ट्रियां घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आबाद हैं। तालकटोरा, नादरगंज, सरोजनीनगर और चिनहट सहित कई क्षेत्रों में करीब दो हजार छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनमें से अधिकांश में आग से निपटने के उपकरण नहीं हैं। जहां अग्निशमन यंत्र लगे भी हैं उनकी जांच जिम्मेदार विभागों द्वारा नहीं की जा रही है। राजधानी के मुख्य बाजार, अस्पताल और अन्य संस्थान भी आग के मुहाने पर हैं। चौक, अमीनाबाद, यहियागंज, नक्खास, जनपथ लवलैन, नाजा, प्रिंस मार्केट, हलवासिया, नाका ओर चारबाग में अठारह हजार से अधिक दुकानें फायर मानकों की अनदेखी कर रही हैं। यहां बिजली के जर्जर तार झूल रहे हैं और ये बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। इन बाजारों में प्रतिदिन कम से कम चार लाख लोगों की आवाजाही होती है। वहीं कारोबार बढ़ाने के लिए बेसमेंट से लेकर कई मंजिला इमारतें बनाई गई हैं लेकिन आग के दौरान इससे निपटने का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है।दूसरी ओर संबंधित विभाग आग के सुरक्षा इंतजामों को लेकर बेहद लापरवाही पूर्ण रवैया अपनाए हुए हैं। यदि ऐसे हादसों को नियंत्रित करना है तो सरकार को न केवल इसके लिए जिम्मेदार विभागों को जवाबदेह बनाना होगा बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही सतत चेकिंग अभियान चलाना होगा।

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