जन औषधि केंद्रों में दवाओं की किल्लत मरीज हो रहे हलकान

  • निजी दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो रहे रोगी
  • बुखार समेत गंभीर रोगों की दवाएं तक नहीं मिल रही केंद्रों पर
  • शिकायत के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश की चिकित्सा सुविधाएं पटरी पर आती नहीं दिख रही है। सरकारी अस्पतालों समेत यहां खोले गए जन औषधि केंद्रों में दवाओं की किल्लत है। लिहाजा गरीबों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके कारण वे प्राइवेट मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर है। वहीं तमाम शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
बलरामपुर अस्पताल में बने जन औषधि केंद्र में बुखार, गैस, बीपी समेत कई बीमारियों की दवाएं नहीं हैं। लिहाजा मरीजों को मजबूरन बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं जबकि अधिकारियों ने जन औषधि केंद्र पर सभी दवाएं बाजार की अपेक्षा 70 प्रतिशत कम दर पर उपलब्ध कराने का दावा किया था लेकिन यह दावा कागजों पर सिमट चुका है। यही हाल सिविल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों का है। यहां सर्दी जुकाम तक की दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। गंभीर रोगों के मरीज दवाओं के लिए रोज औषधि केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं।
गौरतलब है कि गरीब मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने को लेकर केंद्र सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोलने का निर्देश दिया था। इसी के मद्देनजर पिछले साल 15 जुलाई को बलरामपुर, सिविल समेत कई सरकारी अस्पतालों में इन केंद्रों की शुरूआत की गई थी। दावा किया गया था कि इन केंद्रों पर बुखार, बीपी, शुगर समेत कई बीमारियों की दवाएं बाजार से कम पर दी जाएंगी, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

केस-1
मौलवीगंज निवासी अमीन गुर्दे, शुगर और हार्ट की बीमारी से पीडि़त हैं। वे इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें दवाएं लिखी गईं। वह जन औषधि केंद्र पहुंचे लेकिन वहां उन्हें दवा नहीं मिली। उनका कहना है कि वे पिछले तीन दिन से केंद्र का चक्कर काट रहे हैं लेकिन दवाएं नहीं मिल रही है। अस्पताल में भी दवा नहीं है।

केस-2
सिधौली निवासी सोनम सांस की बीमारी से पीडि़त हंै। वह सिविल अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टरों ने सांस की दवाएं लिखी लेकिन उसे ये दवाएं न तो अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध हुई न ही औषधि केंद्र में मिलीं। लिहाजा उसे अस्पताल के बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ीं।

अस्पतालों का भी हाल बेहाल
राजधानी के सरकारी अस्पतालों में भी दवाओं का टोटा है। यही नहीं कई बार तो इन अस्पतालों में अधोमानक दवाएं तक मरीजों को वितरित कर दी गई। हालत यह है कि इन अस्पतालों में बुखार और खांसी जैसी दवाओं की भारी किल्लत है। त्वचा रोग समेत कई रोगों की दवाएं इन अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं।

जन औषधि केंद्र पर दवाएं न होना गंभीर बात है। एजेंसी के जरिए इन केंद्रों का संचालन होता है। दवाओं की कमी को लेकर एजेंसी के अधिकारियों से बात की जाएगी। जल्द समस्या का समाधान होगा।
– डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

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