अब मां और नवजात की देखभाल का पाठ पढेंग़े एमबीबीएस छात्र

  • जल्द शामिल किया जाएगा पाठ्यक्रम में, अभी तक पोषण को किया जाता रहा है नजरअंदाज
  • मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने की बनाई गई रणनीति

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने की रणनीति बना रही है। इसके तहत मां और नवजात बच्चों के देखभाल व पोषण पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) की पढ़ाई में अब मां, नवजात और बाल पोषण (एमआईवाईसीएन) को भी शामिल किया जाएगा। इससे चिकित्सक प्रसूता और शिशु की देखभाल और पोषण को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगे।
प्रदेश में स्वास्थ्य मानकों में सुधार की कवायद की जा रही है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रसूता और नवजात दोनों पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। बौनापन के शिकार बच्चों की संख्या पहले से घटी है। हालांकि नवजात शिशु मृत्यु दर अब भी चिंता का विषय है। इसके मद्देनजर एमआईवाईसीएन को एमबीबीएस के आगामी सत्र में शामिल किया जाएगा। इसकी पढ़ाई एमबीबीएस के तीसरे सत्र से शुरू होगी। इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। हालांकि सरकार की मदद से अब तक प्रयागराज, गोरखपुर, कन्नौज और कानपुर मेडिकल कॉलेज में एमआईवाईसीएन सेवा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया है। इनमें करीब 800 चिकित्साकर्मियों को एमआईवाईसीएन सेवा के सर्विस डिलीवरी प्रोटोकॉल एवं गुणवत्ता सुधार पर प्रशिक्षण दिया गया है। मेडिकल कॉलेज के 51 प्रतिशत हेड ऑफ डिपार्टमेंट एवं टीचिंग फैकल्टी का अनुभव है कि मेडिकल कॉलेज में शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है जबकि 61 प्रतिशत हेड ऑफ डिपार्टमेंट एवं टीचिंग फैकल्टी मानते हैं कि मेडिकल कॉलेज में मातृ पोषण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि एमआईवाईसीएन सेवा पर अधिक ध्यान देने से बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

कार्यशाला में उठा मुद्दा
पिछले दिनों राजधानी में मां, नवजात एवं बाल पोषण को लेकर आयोजित कार्यशाला में भी यह मुद्दा उठा था। इसमें कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, मेरठ, झांसी, कन्नौज, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, जालौन, सहारनपुर, बांदा और बंदायू मेडिकल कालेज के प्रमुखों ने शिरकत की थी। इसके अलावा एम्स गोरखपुर, बीएचयू, आरएमएलआई, केजीएमयू के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया था। सभी ने इस मुद्दे पर चर्चा की और पोषण पर बल दिया। कार्यशाला में मां, नवजात एवं बाल पोषण की आवश्यकता पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कई डॉक्टर्स ने इस संबंध में आने वाली चुनौतियों पर भी अपने अनुभव साझा किए। केजीएमयू की डॉ अंजू अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्यगत मुद्दों पर मेडिकल कॉलेजों को नेतृत्व करने की जरूरत है। इसके लिए उन्हें विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों पर अनुसंधान को और आगे बढ़ाना होगा। बेहतर अनुसंधान, सम्पूर्ण जिम्मेदारी एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष मानक तैयार कर एमआईवाईसीएन के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा।

एमआईवाईसीएन को एबीबीएस के आगामी सत्र में शामिल किया जाएगा। इसकी पढ़ाई तीसरे सत्र से शुरू की जाएगी। इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से सारी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। -डॉ. एन.सी. प्रजापति अतिरिक्त निदेशक, स्वास्थ्य एवं शिक्षा

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