राजधानी के ब्लाइंड प्वाइंट बने मुसीबत हादसे का शिकार हो रहे वाहन चालक

  • कई चौराहे पैदा कर रहे भ्रम, वाहन चालक भटक रहे राह
  • मडिय़ांव और जानकीपुरम से इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज चौराहे पर पहुंचने वाले रास्ते पर हो चुके हैं कई हादसे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। शहर के कुछ इलाकों की बनावट से वाहन चालक भ्रमित होकर हादसे का शिकार हो रहे हैं और कई बार जानकारी के अभाव में लोग यह अनुमान भी नहीं लगा पाते कि आगे सडक़ है और उस पर कोई वाहन आ रहा है।
इंजीनियरिंग कॉलेज और खुर्रमनगर चौराहे पर ब्लाइंट प्वाइंट (अंधा मोड़)के चलते लोग सडक़ हादसों के शिकार हो रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बने मंदिर की वजह से जानकीपुरम की ओर से आने वालों को मडिय़ांव की ओर से फ्लाईओवर होकर आ रही तेज रफ्तार गाडिय़ां दिखाई नहीं देती हैं। इसके अलावा गोमती नगर स्थित दयाल पैराडाइज चौराहे के आकार के कारण भी लोग भ्रमित हो जाते हैं। अक्सर ग्वारी चौराहे से दयाल चौराहे पर आने वालों को यह नहीं दिखता की यह रोड सीएमएस की ओर जाती है। ऐसे में कई बार लोग रास्ता भटक कर दूसरी दिशा में चले जाते हैं। पिछले साल इसी वजह से एलडीए ने नगर निगम के अनुरोध पर चौराहे में कुछ सुधार किया था लेकिन अभी भी चौराहे की यह समस्या पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है। लोहिया पथ की बात करें तो लोहिया पथ को रिंग रोड से जोडऩे वाले कुकरैल पुल तक आने के लिए खुर्रमनगर चौराहे से करीब आठ सौ मीटर तक छोटी बड़ी हर गाड़ी सर्विस लेन पर रॉन्ग साइड दौड़ती दिखती है। यह प्वाइंट पीडब्ल्यूडी, आरटीओ और पुलिस के ब्लैक स्पॉट की सूची में कई साल से शामिल होते आ रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ। वहीं नगर निगम दयाल पैराडाइज़ चौराहे को लेकर कई पत्र एलडीए को भेज चुका है बावजूद इसके हालात सुधरने के बजाय और बदतर हो गए। इसके पीछे एक कारण और भी है। खुर्रमनगर और इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के दुकानदारों ने बताया कि रात आठ बजे ही ट्रैफिक पुलिसकर्मी ड्यूटी छोडक़र गायब हो जाते हैं। रिंग रोड पर शाम सात बजे से रात 12 बजे तक ट्रैफिक लोड दिन के अपेक्षा करीब दो गुना बढ़ जाता है, जिससे स्थिति बहुत खराब हो जाती है। यहां ज्यादातर हादसे रात नौ बजे के बाद ही होते हैं।

नदारद रहते हैं टै्रफिक पुलिस कर्मी

सूत्रों का कहना है कि भिठौली मोड़, देवा रोड और कुकरैल की तरफ से बड़ी गाडिय़ां ओवरलोडिंग करके गुजरती हैं। दोनों चौराहों के ट्रैफिककर्मी रात आठ बजे के बाद ट्रैफिक संचालित करवाने की बजाय इन्हीं रास्तों पर पहुंचकर भारी वाहनों को रोकने में जुट जाते हैं।

कभी भी हो सकती है दुर्घटना

इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे की बात करें तो इस चौराहे से जानकीपुरम की ओर जाने वाली सडक़ के कोने पर वर्षों पुराना मंदिर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रिंग रोड के निर्माण से पहले से यहां मंदिर स्थापित है। इसके ठीक बाद यहां फ्लाईओवर बना। यहां पूरे दिन दोनों तरफ से बड़ी संख्या में गाडिय़ों का आवागमन रहता है, लेकिन इस ब्लाइंड प्वाइंट पर दोनों तरफ के गाड़ी वाले एक-दूसरे को देख नहीं पाते हैं। फ्लाईओवर से उतरने वाली गाडिय़ों की रफ्तार अमूनन 50-60 किलोमीटर प्रतिघंटा रहती है। दूसरी ओर से भी वाहन करीब इसी तेजी में आते हैं। ट्रैफिक कर्मियों को एक तरफ का ट्रैफिक रोकने में देरी से हादसे हो जाते हैं।

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