रंग दिखाने लगी चिकित्सकों की पहल अब एचआईवी पीडि़त भी बसा रहे घर

  • केजीएमयू के एआरटी सेंटर के चिकित्सक पीडि़त रोगियों की शादी के लिए करते हैं काउंसलिंग
  • अभी तक तीस जोड़े बंध चुके हैं शादी के बंधन में, जागरूकता से कम हो रही रोग की दहशत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के एआरटी सेंटर के चिकित्सकों की पहल रंग दिखाने लगी है। चिकित्सकों के हिम्मत बंधाने और जागरूक करने के बाद अब एचआईवी पीडि़त भी अपना घर बसा रहे हैं। चिकित्सकों के प्रयासों का नतीजा है कि अब तक तीस जोड़े शादी के बंधन में बंध चुके हैं जबकि 156 पीडि़तों ने शादी के लिए पंजीकरण कराया है।
केजीएमयू स्थित एआरटी सेंटर में मौजूदा समय में एचआईवी से पीडि़त 2900 मरीज दर्ज हैं। इनका इलाज किया जा रहा है। एचआईवी पीडि़तों के विवाह का सिलसिला शुरू करने को लेकर डॉक्टर सौरभ पालीवाल कहते हैं कि सन 2010 से यह कार्यक्रम शुरू हुआ। इस वर्ष करीब आठ एचआईवी पीडि़त जोड़े शादी के बंधन में बंधे। इसके बाद से यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। ये जोड़े घर बसाने के बाद बेहद खुश हैं और उनके मन से रोग को लेकर निराशा और अवसाद का भाव खत्म हो गया है। यह समाज के लिए एक बेहतर पहल है। रोग के प्रति जागरूकता ने इन पीडि़तों को घर बसाने की हिम्मत दी। इसके लिए चिकित्सक खुद पीडि़तों के परिवारों को आपस में मिलाते हैं और उनकी काउंसलिंग करते हैं। लिहाजा पीडि़तों में विवाह बंधन में बंधने की इच्छा जागृत हो रही है। वे निराशा के दौर से बाहर आ रहे हैं। अब तो वे विवाह के लिए बाकायदा पंजीकरण करा रहे हैं। अभी तक करीब 30 एचआईवी पीडि़तों की आपस में शादी कराई जा चुकी है। इसके अलावा 156 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं।

दुव्र्यवहार रोकने के लिए लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव

यूपी एड्स कंट्रोल सोसायटी के अनुज दीक्षित ने बताया कि एचआईवी मरीजों की शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रत्येक मंडल में लोकपाल नियुक्त करने को लेकर एक प्रपोजल तैयार किया गया है। प्रपोजल शासन को भेजा जा रहा है ताकि प्रदेश के प्रत्येक मंडल में लोकपाल नियुक्त हो सके। 10 सितंबर 2018 को केंद्र सरकार ने एचआईवी-एड्स एक्ट 2017 पास किया था। इस एक्ट के तहत एड्स पीडि़तों की शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रत्येक मंडल में लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसको लेकर यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के अधिकारियों ने मार्च में बैठक की थी।

गर्भ में पल रहा बच्चा नहीं होगा प्रभावित
एआरटी के नोडल अधिकारी डॉ. डी. हिमांशु ने बताया कि एचआईवी से ग्रस्त माता के गर्भ में पल रही संतान को डॉक्टरों की देखरेख में उनके द्वारा निर्धारित की गई दवाओं के प्रयोग से मुक्त रखा जा सकता है।

बंद पड़ा है हेल्पलाइन नंबर
सरकार द्वारा एचआईवी पीडि़तों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था लेकिन लापरवाही के कारण यह बंद पड़ा है। इसके कारण पीडि़त अपनी शिकायतें नहीं दर्ज करा पा रहे हैं।

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